आषाढ़ माह की पूर्णिमा तिथि को गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जाता है। यह पर्व न केवल हमारे गुरुओं के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का दिन है, बल्कि जीवन में ज्ञान और प्रकाश के महत्व को समझने का अवसर भी है इसी पावन तिथि पर चारों वेदों के रचयिता और महाभारत ग्रंथ के लेखक महर्षि कृष्णद्वैपायन व्यास (वेदव्यास जी) का जन्म हुआ था. उन्हें आदिगुरु माना जाता है, इसलिए इस दिन को 'व्यास पूर्णिमा' भी कहा जाता है. इसके अतिरिक्त, इसी दिन भगवान बुद्ध ने सारनाथ में अपना पहला उपदेश दिया था, जिससे बौद्ध धर्म में भी इस दिन का बड़ा महत्व है. पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ 28 जुलाई को शाम 6:18 बजे होगा पूर्णिमा तिथि का समापन 29 जुलाई को रात 8:05
बजे होगा , उदयातिथि अनुसार 29 जुलाई को स्नान, दान व्रत की गुरु पूर्णिमा मनाई जाएगी । 29 जुलाई को सुबह 05:41 से सुबह 09 :47 तक. पूजा हेतु श्रेष्ठ समय है , शुभ मुहूर्त में गुरु पूजन, मंत्र जाप, ध्यान, दान-पुण्य और सत्यनारायण कथा करना अत्यंत फलदायी माना गया है.29 जुलाई को चंद्रमा उत्तराषाढ़ा नक्षत्र और मकर राशि में मौजूद रहेंगे. इसके साथ ही इस दिन गुरु (बृहस्पति) ग्रह कर्क राशि में उच्च के होंगे . इस शुभ योग में गुरु की पूजा-अर्चना करने से जीवन में सुख, समृद्धि, ज्ञान और मानसिक शांति की प्राप्ति होती है
पूजन विधि : पूर्णिमा के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र ( पीले या सफेद) धारण करें. चौकी स्थापित करें: घर के उत्तर-पूर्व कोने (ईशान कोण) में एक चौकी रखें और उस पर पीला या सफेद कपड़ा बिछाएं. प्रतिमा की स्थापना: चौकी पर महर्षि वेदव्यास, अपने गुरुदेव, या भगवान विष्णु/शिव की तस्वीर स्थापित करें. प्रतिमा पर रोली, चंदन, अक्षत, पीले फूल, फल और मिठाई अर्पित करें. गुरु के चरणों का ध्यान कर उन्हें प्रणाम करें. पूजा के समय 'ॐ गुरुभ्यो नमः' या 'गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु...' मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें. अंत में कपूर से गुरु की आरती करें और परिवार के सभी बड़े-बुजुर्गों व गुरुओं के पैर छूकर आशीर्वाद लें.
- ज्योतिषाचार्य एस.एस. नागपाल, स्वास्तिक ज्योतिष केन्द्र, अलीगंज, लखनऊ
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