बांदा, के एस दुबे । गैंगस्टर एक्ट के एक पुराने मामले में बांदा की विशेष अदालत ने दो अभियुक्तों को दोषी ठहराते हुए तीन-तीन वर्ष के कठोर कारावास और ₹5-5 हजार के अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड अदा न करने पर प्रत्येक अभियुक्त को एक माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। विशेष लोक अभियोजक (गैंगस्टर एक्ट) सौरभ सिंह ने बताया कि थाना बदौसा में तत्कालीन थाना प्रभारी राजीव यादव द्वारा 2 जून 2015 को मु0अ0सं0 69/2015 के तहत उत्तर प्रदेश गिरोहबंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप निवारण अधिनियम, 1986 की धारा 2/3 में कमलेश पुत्र गामा सिंह एवं चुनूबाद पुत्र रामदयाल के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया गया था।
अभियोजन के अनुसार दोनों अभियुक्त एक संगठित आपराधिक गिरोह के सक्रिय सदस्य थे, जिसका सरगना सन्नू सिंह था। मुकदमे के दौरान उसकी मृत्यु हो गई। गिरोह के सदस्यों पर पूर्व से कई आपराधिक मुकदमे दर्ज थे और वे संगठित रूप से अपराध कर आर्थिक एवं भौतिक लाभ अर्जित करते थे। इन्हीं तथ्यों के आधार पर गैंग चार्ट तैयार कर सक्षम प्राधिकारी से अनुमोदन एवं अभियोजन स्वीकृति प्राप्त की गई। मामले की विवेचना तत्कालीन निरीक्षक शिव सागर पांडेय ने की। विवेचना के दौरान गैंग चार्ट, एफआईआर, सामान्य डायरी सहित अन्य दस्तावेजी साक्ष्य संकलित कर न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया गया।
सुनवाई के दौरान 12 फरवरी 2016 को आरोप तय किए गए। अभियोजन पक्ष ने छह गवाहों के बयान एवं अभिलेखीय साक्ष्य प्रस्तुत किए। अभियोजन विभाग के समन्वय और प्रभावी पैरवी के आधार पर अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश (गैंगस्टर एक्ट), बांदा श्री पाल सिंह ने दोनों अभियुक्तों को दोषी करार दिया। न्यायालय ने अपने 29 पृष्ठीय निर्णय में कमलेश पुत्र गामा सिंह और चुनूबाद पुत्र रामदयाल को तीन-तीन वर्ष के कठोर कारावास तथा ₹5-5 हजार के अर्थदंड से दंडित किया। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में प्रत्येक अभियुक्त को एक माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। अभियोजन की ओर से इस मामले में विशेष लोक अभियोजक सौरभ सिंह, पैरोकार पुष्पेंद्र कुमार तथा कोर्ट मोहर्रिर रघुनाथ मौर्य ने प्रभावी पैरवी की, जिसके परिणामस्वरूप न्यायालय ने अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों को स्वीकार करते हुए दोनों अभियुक्तों को सजा सुनाई।


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