बांदा, के एस दुबे । गैंगस्टर एक्ट के एक पुराने मामले में बांदा की विशेष न्यायालय ने तीन अभियुक्तों को दोषी ठहराते हुए प्रत्येक को तीन-तीन वर्ष के कठोर कारावास तथा ₹6,000-₹6,000 के अर्थदंड की सजा सुनाई है। जुर्माना अदा न करने पर प्रत्येक अभियुक्त को दो माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। विशेष लोक अभियोजक (गैंगस्टर एक्ट) सौरभ सिंह ने बताया कि थाना कोतवाली नगर में वर्ष 2014 में तत्कालीन वादी विवेकानंद तिवारी की तहरीर पर मु0अ0सं0 475/2014 के तहत उत्तर प्रदेश गिरोहबंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम, 1986 की धारा 2/3 में राहुल पुत्र भृगुनाथ प्रसाद सोनी, धर्मपाल सिंह पुत्र रामचरण उर्फ रामभरोसे और अश्वनी सोनी पुत्र जगरूप सोनी के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया गया था।
अभियोजन के अनुसार तीनों अभियुक्त संगठित गिरोह बनाकर अपराध करते थे तथा अपराधों के माध्यम से आर्थिक और भौतिक लाभ अर्जित करते हुए क्षेत्र में भय और आतंक का माहौल बनाए हुए थे। इनके विरुद्ध पूर्व से कई आपराधिक मुकदमे दर्ज थे, जिनके आधार पर गैंग चार्ट तैयार कर सक्षम प्राधिकारी से अनुमोदन एवं अभियोजन स्वीकृति प्राप्त की गई। मामले की विवेचना उपनिरीक्षक शिवमिलन एवं संतराम ने की। विवेचना के दौरान गैंग चार्ट, एफआईआर, सामान्य डायरी, आपराधिक इतिहास सहित अन्य दस्तावेजी साक्ष्य संकलित कर न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किया गया।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान 17 अगस्त 2015 को आरोप तय किए गए। अभियोजन पक्ष ने छह गवाहों के बयान दर्ज कराए और अभिलेखीय साक्ष्य न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए। अभियोजन विभाग के समन्वय, पैरोकार अभिलाष यादव तथा कोर्ट मोहर्रिर रघुनाथ और अमित की प्रभावी पैरवी के बाद अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश (गैंगस्टर एक्ट), बांदा श्रीपाल सिंह ने उपलब्ध मौखिक एवं दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर तीनों अभियुक्तों को दोषी करार दिया। न्यायालय ने अपने निर्णय में प्रत्येक अभियुक्त को 3-3 वर्ष के कठोर कारावास और ₹6,000 के अर्थदंड से दंडित किया है। जुर्माना जमा न करने पर प्रत्येक को दो माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।


No comments:
Post a Comment