आखिर किसके संरक्षण में चल रहा खेल, निष्पक्ष जांच की मांग
बांदा, के एस दुबे । जनपद में प्राइवेट यात्री बसों के माध्यम से बड़े पैमाने पर व्यापारिक माल की ढुलाई को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों का आरोप है कि प्रतिदिन दिल्ली समेत अन्य महानगरों से लाखों रुपये का व्यापारिक माल यात्री बसों के जरिए बांदा लाया जाता है, जिससे संभावित जीएसटी चोरी की आशंका जताई जा रही है। बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे बनने के बाद दिल्ली और बांदा के बीच आवागमन आसान हुआ है। इसके साथ व्यापारिक गतिविधियां भी बढ़ी हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ प्राइवेट बसों की डिक्की ही नहीं, बल्कि उनकी छतों पर भी भारी मात्रा में माल लादकर लाया जाता है। यदि ऐसा हो रहा है तो यह न केवल परिवहन नियमों का उल्लंघन है, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा है।
लोगों का कहना है कि बड़े बाईपास क्षेत्र में राज्य कर (जीएसटी) विभाग और परिवहन विभाग की टीमें मौजूद रहती हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि बसों से आने वाले व्यापारिक माल के बिल, ई-वे बिल और अन्य दस्तावेजों की नियमित जांच होती है या नहीं। यदि जांच होती है तो उसके परिणाम सामने क्यों नहीं आते, और यदि नहीं होती तो यह प्रवर्तन व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न है। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो सरकार को हर माह लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हो सकता है। वहीं नियमों का पालन करने वाले व्यापारी भी इससे प्रभावित होते हैं। अब जनपद में मांग उठ रही है कि जिला प्रशासन, राज्य कर (जीएसटी) विभाग और परिवहन विभाग संयुक्त रूप से विशेष अभियान चलाकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करें। यदि जांच में किसी प्रकार की कर चोरी या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए। संबंधित विभागों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।


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