बांदा, के एस दुबे । टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) की अनिवार्यता के विरोध में टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (टीएफआई) के राष्ट्रीय नेतृत्व के आह्वान पर सोमवार को बांदा में सैकड़ों शिक्षकों ने सांसद कृष्णा पटेल को ज्ञापन सौंपा। राष्ट्रीय सचिव एवं उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष आशुतोष त्रिपाठी तथा जिला मंत्री प्रजीत सिंह के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शिक्षक-शिक्षिकाएं शामिल हुईं। शिक्षकों ने ज्ञापन के माध्यम से मांग की कि 23 अगस्त 2010 को निर्धारित मिनिमम क्वालिफिकेशन के पैरा-4 को संसद से अधिनियम में शामिल कर लाखों शिक्षकों और उनके करोड़ों परिजनों को राहत प्रदान की जाए। यह ज्ञापन प्रधानमंत्री और केंद्रीय
शिक्षा मंत्री को भी प्रेषित किया गया है। जिला मंत्री प्रजीत सिंह ने कहा कि सरकार को संसद के मानसून सत्र में अध्यादेश लाकर इस समस्या का समाधान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा शिक्षकों के परीक्षा पास करने या न करने का नहीं है, बल्कि 20-25 वर्ष की सेवा के बाद नए नियम लागू करना नैसर्गिक न्याय के विरुद्ध है। यदि आज शिक्षा विभाग में ऐसा हो रहा है तो भविष्य में अन्य विभागों में भी ऐसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
संयुक्त मंत्री जय किशोर दीक्षित ने कहा कि वर्तमान शिक्षक अपनी नियुक्ति के समय निर्धारित शैक्षिक योग्यताओं और चयन प्रक्रिया को पूरा कर नियुक्त हुए थे। ऐसे में वर्षों की सेवा के बाद नए नियम लागू करना उचित नहीं है। उन्होंने सरकार से इस विषय पर पुनर्विचार करने की मांग की। इससे पूर्व शिक्षक जीआईसी मैदान में एकत्र हुए और वहां से मोटरसाइकिल रैली निकालते हुए समाजवादी पार्टी कार्यालय पहुंचे, जहां सांसद कृष्णा पटेल को ज्ञापन सौंपा गया। कार्यक्रम में वरिष्ठ उपाध्यक्ष रमाशंकर यादव, कोषाध्यक्ष रामसुफल कश्यप, जनपदीय पदाधिकारी, ब्लॉक अध्यक्ष, मंत्री, संघर्ष समिति के पदाधिकारी, तहसील एवं महिला पदाधिकारी सहित सैकड़ों शिक्षक-शिक्षिकाएं मौजूद रहे।


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