परिसर में स्थापित होगा हेरिटेज मैनेजमेंट केंद्र
देवेश प्रताप सिंह राठौर
उत्तर प्रदेश झांसी झाँसी बुंदेलखंड विश्वविद्यालय (BU), झाँसी और देश की प्रतिष्ठित विरासत संरक्षण संस्था 'इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज' (INTACH), झाँसी चैप्टर के बीच आज एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए. इस समझौते का मुख्य उद्देश्य पुरातत्व, सांस्कृतिक विरासत, संरक्षण और प्रबंधन के क्षेत्रों में संयुक्त अनुसंधान, शिक्षा और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देना है.
इस ऐतिहासिक अवसर पर बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. मुकेश पांडेय, कुलसचिव श्री ज्ञानेन्द्र कुमार, आईक्यूएसी (IQAC) के डायरेक्टर प्रो. सुनील कुमार काबिया, प्रो. अवनीश कुमार, डॉकटर ऋषि सक्सेना, डॉ. हितिका यादव, श्री हेमन्त चंद्रा और श्री चन्द्र भान प्रजापति गरिमामयी रूप से उपस्थित रहे। वहीं इंटैक मुख्यालय से गवर्निंग कौंसिल सदस्य एवं चैप्टर्स डिवीज़न एडवाइजरी कमेटी के चेयरमैन नीलकमल माहेश्वरी एवं इंटैक झाँसी चैप्टर के संयोजक श्री राजेंद्र कुमार राय उपस्थित रहे।
एमओयू की मुख्य विशेषताएं और उद्देश्य:
हेरिटेज सेंटर की स्थापना: इस समझौते के तहत विश्वविद्यालय परिसर में 'इनटेक बीयू सेंटर फॉर हेरिटेज मैनेजमेंट एंड कंजर्वेशन' (CHMC) की स्थापना की जाएगी. अत्याधुनिक प्रयोगशाला: शोध और वैज्ञानिक परीक्षणों को बढ़ावा देने के लिए बुंदेलखंड विश्वविद्यालय परिसर में एक विशेष 'संरक्षण प्रशिक्षण, अनुसंधान और परीक्षण प्रयोगशाला' (Conservation Laboratory) स्थापित की जाएगी. असुरक्षित स्मारकों का संरक्षण: दोनों संस्थाएं मिलकर बुंदेलखंड क्षेत्र की उन ऐतिहासिक विरासतों और असुरक्षित स्मारकों के संरक्षण व जागरूकता के लिए काम करेंगी, जो एएसआई (ASI) या राज्य पुरातत्व विभाग के अंतर्गत नहीं आते हैं.
अकादमिक गतिविधियां: इसके अंतर्गत अल्पकालिक पाठ्यक्रम (Short-term courses), व्याख्यान, कार्यशालाएं, सेमिनार और प्रदर्शनियां आयोजित की जाएंगी, साथ ही ऑडियो-विजुअल शिक्षण सामग्री और अकादमिक जर्नल भी प्रकाशित किए जाएंगे. इस अवसर पर विश्वविद्यालय के प्रशासनिक अधिकारियों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि बुंदेलखंड क्षेत्र ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत समृद्ध है। इनटेक के साथ यह अनूठा सहयोग शोधार्थियों, छात्रों और स्थानीय समुदायों के बीच सांस्कृतिक जागरूकता बढ़ाने और हमारी अमूर्त सांस्कृतिक विरासत को सहेजने में एक मील का पत्थर साबित होगा।


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