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Thursday, August 27, 2026

गंगा का बढ़ रहा जलस्तर, कालिंदी में भी बनी रफ्तार

बाढ़ की जद में नजर आ रही कटरी, तिरहार के भी बिगड़ रहे हालात

फतेहपुर, मो शमशाद । प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में हो रही लगातार व भारी बारिश का असर अब जिले से होकर गुजरने वाली प्रमुख नदियों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। गंगा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ते हुए खतरे के निशान के बेहद करीब पहुंच गया है, जबकि कालिंदी यानी यमुना नदी में भी जलस्तर बढ़ने की रफ्तार ने नदी किनारे बसे लोगों की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि यमुना अभी खतरे के निशान से काफी नीचे है, लेकिन दोनों नदियों के बढ़ते जलस्तर ने कटरी के साथ तिरहार क्षेत्र में बाढ़ की आशंका को प्रबल बना दिया है।

गंगा नदी में आए पानी का दृश्य।

गुरुवार सुबह की रिपोर्ट के अनुसार गंगा नदी का जलस्तर 100.76 मीटर दर्ज किया गया, जबकि गंगा में खतरे का निशान 100.86 मीटर है। यानी गंगा खतरे के निशान से महज 10 सेंटीमीटर नीचे बह रही है। जलस्तर में लगातार हो रही बढ़ोतरी को देखते हुए प्रशासन के साथ-साथ नदी किनारे बसे ग्रामीणों की नजर अब गंगा की हर गतिविधि पर टिकी हुई है। वहीं कालिंदी यानी यमुना नदी का सुबह जलस्तर 90.81 मीटर दर्ज किया गया। यमुना में खतरे का निशान 100.00 मीटर निर्धारित है। फिलहाल यमुना खतरे के निशान से नीचे है, लेकिन प्रदेश में लगातार बारिश और ऊपरी क्षेत्रों से आने वाले पानी की स्थिति ने इसके बढ़ते जलस्तर को भी चिंता का विषय बना दिया है। यही वजह है कि प्रशासन और ग्रामीण दोनों ही नदियों की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

जिंदादिल कटरी में नजर आ रही बेचैनी

गंगा का जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुंचने के साथ ही सबसे अधिक चिंता कटरी क्षेत्र को लेकर दिखाई दे रही है। नदी के किनारे और निचले इलाकों में बसे गांवों के सामने बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। कटरी क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि नदी का जलस्तर बढ़ने पर सबसे पहले निचले इलाके प्रभावित होते हैं। ग्रामीणों के सामने सिर्फ पानी भरने का संकट ही नहीं होता, बल्कि फसल, पशुओं के चारे, आवागमन और रोजमर्रा की जरूरतों पर भी इसका सीधा असर पड़ता है।

तिरहार के भी अच्छे नहीं हालात

गंगा के साथ-साथ यमुना के बढ़ते जलस्तर का असर तिरहार क्षेत्र की चिंता भी बढ़ा रहा है। यमुना अभी खतरे के निशान से काफी नीचे है, लेकिन लगातार बारिश की स्थिति में नदी के जलस्तर में तेजी से बदलाव संभव है। तरहार क्षेत्र के लोगों के लिए नदी का बढ़ता पानी केवल प्राकृतिक बदलाव नहीं, बल्कि खेती और जीवन की दिनचर्या से जुड़ा बड़ा सवाल है। बारिश यदि इसी तरह जारी रहती है और नदियों में पानी की आवक बढ़ती है तो आने वाले दिनों में निचले क्षेत्रों की स्थिति बदल सकती है। 

उफनाते दरिया, सतर्कता की जरूरत

गंगा का खतरे के निशान से महज 10 सेंटीमीटर नीचे पहुंचना प्रशासन के लिए भी अलर्ट की स्थिति है। ऐसे समय में नदी किनारे के निचले इलाकों पर नजर रखना, संभावित बाढ़ प्रभावित गांवों की स्थिति की निगरानी करना और जरूरत पड़ने पर राहत एवं बचाव की तैयारियों को सक्रिय रखना जरूरी होगा। फिलहाल फतेहपुर में नदी किनारे रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है। बारिश और जलस्तर के अगले आंकड़े यह तय करेंगे कि गंगा का उफान कहां तक पहुंचता है और कालिंदी की रफ्तार कितनी तेज होती है लेकिन इतना तय है कि गंगा के खतरे के निशान के करीब पहुंचने और यमुना के लगातार बढ़ने ने कटरी और तरहार की जिंदगी को एक बार फिर बाढ़ के साये में ला खड़ा किया है।


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