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Monday, August 24, 2026

पड़ोहरा ग्राम पंचायत में 1.36 करोड़ रुपये के गबन का आरोप, उच्चस्तरीय जांच की मांग

बांदा, के एस दुबे । जसपुरा विकासखंड की ग्राम पंचायत पड़ोहरा में विकास कार्यों के लिए आवंटित करीब 1 करोड़ 36 लाख 62 हजार 242 रुपये की सरकारी धनराशि में कथित वित्तीय अनियमितता और गबन का आरोप लगाते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की गई है। ग्राम पंचायत निवासी शिव प्रताप सिंह पुत्र रामकिशोर सिंह ने अधिकारियों को शिकायती पत्र भेजकर ग्राम प्रधान पर गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि पिछले पांच वर्षों के दौरान ग्राम पंचायत में विकास कार्यों के नाम पर खर्च की गई धनराशि में नियमों की अनदेखी


की गई। आरोप लगाया गया है कि विकास कार्यों और सामग्री आपूर्ति के नाम पर भुगतान ग्राम प्रधान के पति, पुत्र, सगे-संबंधियों तथा कुछ ग्राम पंचायत सदस्यों से जुड़े बैंक खातों में किया गया। शिकायत में हितों के टकराव और सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका जताई गई है।

शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि कुछ फर्मों और वेंडरों के माध्यम से बिना वास्तविक सामग्री आपूर्ति के भुगतान किए गए। ईंट, सीमेंट, बालू, गिट्टी, हैंडपंप सामग्री, लाइट सामग्री और मजदूरी आदि के नाम पर भुगतान किए जाने का आरोप लगाते हुए पूरे मामले की बैंक लेनदेन के आधार पर जांच कराने की मांग की गई है।


मनरेगा भुगतान में भी गड़बड़ी का आरोप

शिकायत में मनरेगा योजना के मस्टर रोल में अपात्र लोगों के नाम दर्ज कराकर मजदूरी की धनराशि उनके खातों में भेजे जाने का आरोप लगाया गया है। इसके अलावा खड़ंजा, सीसी रोड, हैंडपंप, स्ट्रीट लाइट, वाटर कूलर, सीसीटीवी कैमरा, नाली, इंटरलॉकिंग और मरम्मत सहित विभिन्न कार्यों में भी अनियमितता का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि कई कार्य या तो धरातल पर नहीं हुए अथवा मानक के अनुरूप नहीं कराए गए।


बैंक खातों और अभिलेखों की फॉरेंसिक जांच की मांग

शिकायतकर्ता ने ग्राम पंचायत के बैंक खातों से हुए सभी लेनदेन, PFMS और ई-ग्राम स्वराज भुगतान विवरण की फॉरेंसिक एवं ऑडिट जांच कराने की मांग की है। साथ ही निष्पक्ष तकनीकी टीम गठित कर ग्रामीणों की मौजूदगी में सभी विकास कार्यों का स्थलीय भौतिक सत्यापन कराने की मांग की गई है। शिकायत में दोष सिद्ध होने पर संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई, सरकारी धन की रिकवरी और प्राथमिकी दर्ज कराने की मांग की गई है। साथ ही ग्राम प्रधान के वित्तीय अधिकारों पर रोक लगाने और संबंधित सचिव के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की मांग भी उठाई गई है। हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। मामले में निष्पक्ष जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। अब देखना है कि संबंधित अधिकारी शिकायत का संज्ञान लेकर जांच कराते हैं या नहीं।







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