बाढ़ के दौरान कई गांवों का आवागमन हो जाता है बंद, नाव के सहारे ग्रामीणों की जिंदगी
बांदा, के एस दुबे । चंद्रावल नदी पर पुल निर्माण की लंबे समय से चली आ रही मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। क्षेत्र के ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों और शासन-प्रशासन के प्रति नाराजगी जताते हुए साफ शब्दों में कहा है कि “पुल नहीं तो वोट नहीं।” ग्रामीणों का कहना है कि हर वर्ष बाढ़ के दौरान नदी का जलस्तर बढ़ने से कई गांवों का संपर्क मुख्य मार्गों से कट जाता है और लोगों को आवागमन के लिए नाव का सहारा लेना पड़ता है। ग्रामीणों के मुताबिक अमारा गांव की चंद्रावल नदी पर लंबे समय से पुल निर्माण की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हुई। नदी में पानी बढ़ने के बाद छात्र-छात्राओं, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और मरीजों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ता है।
नाव के सहारे आवागमन, कई घंटे करना पड़ता है इंतजार
ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ के समय नदी पार करने के लिए नाव ही एकमात्र सहारा रह जाती है। कई बार नाव उपलब्ध नहीं होने पर लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ता है। आपात स्थिति में मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में भी काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों का दावा है कि पूर्व में समय पर इलाज न मिल पाने के कारण गंभीर घटनाएं भी हो चुकी हैं।
उदयवीर सिंह, ग्राम पंचायत सदस्य, मुन्नी अवस्थी, मोहित, मनोज सिंह, बाबू निषाद समेत अन्य ग्रामीणों ने कहा कि वर्षों से पुल की मांग की जा रही है, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द पुल निर्माण की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाया गया तो आगामी चुनाव में “पुल नहीं तो वोट नहीं” के नारे के साथ विरोध किया जाएगा।
पूर्व डीएम से भी रखी जा चुकी है मांग
ग्राम प्रधान अशोक कुमार विश्वकर्मा ने बताया कि कुछ दिन पहले बैठक के दौरान चंद्रावल नदी पर पुल निर्माण की मांग प्रमुखता से उठाई गई थी। उनके अनुसार जिलाधिकारी के समक्ष भी समस्या रखी गई थी और शासन स्तर पर मांग भेजे जाने की बात कही गई थी। हालांकि, ग्राम प्रधान का आरोप है कि क्षेत्रीय राजनीति के कारण पुल निर्माण की मांग आगे नहीं बढ़ सकी।
बाढ़ में कट जाता है कई गांवों का संपर्क
ग्रामीणों का कहना है कि चंद्रावल नदी पर पुल का निर्माण केवल आवागमन की सुविधा का मामला नहीं बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और आपातकालीन सेवाओं से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है। बाढ़ के दौरान संपर्क मार्ग बाधित होने से छात्र-छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित होती है और मरीजों को अस्पताल पहुंचाना चुनौती बन जाता है।


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