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Friday, September 11, 2026

सपा के टिकट पर वैश्य समाज का दावा, सियासी गलियारों में गरमाया बाजार

बांदा, के एस दुबे । सदर विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी के टिकट को लेकर सियासी तापमान अचानक बढ़ गया है। अब तक अलग-अलग सामाजिक वर्गों पर दांव लगाने वाली समाजवादी पार्टी के सामने इस बार वैश्य समाज का चेहरा एक नए राजनीतिक विकल्प के रूप में तेजी से उभर रहा है।वैश्य शक्ति संगठन और समाज के समर्थकों का दावा है कि सरकारी आंकड़ों के मुताबिक सदर विधानसभा क्षेत्र में वैश्य समाज की आबादी सर्वाधिक है। ऐसे में सवाल उठाया जा रहा है कि इतनी बड़ी मौजूदगी वाले समाज को विधानसभा चुनाव में राजनीतिक प्रतिनिधित्व क्यों न मिले? यही सवाल अब सपा के टिकट की रेस में नया मोड़ ला रहा है।  तीन प्रयोग रहे विफल, नहीं बदले नतीजे  बाँदा सदर सीट पर सपा के पिछले चुनावी प्रयोगों पर नजर डालें तो पार्टी ने अलग-अलग


सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश की, लेकिन चुनावी नतीजे पार्टी के पक्ष में नहीं आ सके।कायस्थ चेहरा जमुना प्रसाद बोस, ब्राह्मण चेहरा अमिता वाजपेयी,ठाकुर चेहरा मंजुला विवेक सिंह लगातार मिले झटकों के बाद अब सियासी गलियारों में चर्चा है कि क्या सपा को इस बार अपनी पुरानी सोशल इंजीनियरिंग की रणनीति बदलकर नया प्रयोग करना चाहिए। लोकसभा का ‘गुप्ता फैक्टर’ फिर चर्चा में सपा रणनीतिकारों के सामने वैश्य समाज को लेकर एक पुराना सफल उदाहरण भी है। जब पार्टी ने श्यामा चरण गुप्ता पर भरोसा जताते हुए बांदा-चित्रकूट लोकसभा सीट से चुनावी मैदान में उतारा था, तो उन्होंने जीत हासिल की थी। जब लोकसभा चुनाव में वैश्य चेहरे पर भरोसा कामयाब हो सकता है, तो बाँदा सदर विधानसभा सीट पर क्यों नहीं?अयोध्यावासी वैश्य चेहरे की मांग से बढ़ी हलचल  जिले में अयोध्यावासी वैश्य समाज को प्रतिनिधित्व देने की मांग भी तेजी पकड़ रही है। समर्थकों का कहना है कि यदि पार्टी स्थानीय पकड़ वाले, सर्वमान्य और संगठन को साथ लेकर चलने वाले वैश्य चेहरे को टिकट देती है, तो बांदा सदर सीट पर मुकाबले की पूरी तस्वीर बदल सकती है।हालांकि चुनाव केवल जातीय आंकड़ों के बल पर नहीं जीते जाते; प्रत्याशी की व्यक्तिगत छवि, बूथ मैनेजमेंट और अन्य वर्गों में स्वीकार्यता भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। लेकिन यही वह बिंदु है जहां वैश्य चेहरा सपा के लिए एक बड़ा मास्टरस्ट्रोक साबित हो सकता है।टिकट के ऐलान से पहले ही घमासान बाँदा सदर में अभी टिकट का आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है, लेकिन दावेदारियों ने चुनावी गणित को गर्मा दिया है। सदर क्षेत्र में हमारी आबादी सबसे बड़ी।लोकसभा में श्यामा चरण गुप्ता का प्रयोग रहा सफल। पुराने समीकरणों पर ही टिके रहें या वैश्य चेहरे पर नया दांव खेलें?अब गेंद पूरी तरह से समाजवादी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के पाले में है। एक टिकट का फैसला बाँदा सदर सीट का पूरा चुनावी खेल पलट सकता है।


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