फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र से पेंशन हड़पने का आरोप
फतेहपुर, मो शमशाद । नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों रुपये की कथित ठगी के आरोपों में घिरे सुमित सिंह का एक और मामला सामने आया है। आरोप है कि सुमित सिंह ने अपने परिवार के सदस्यों के नाम पर फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाकर कई वर्षों तक सरकार की दिव्यांग पेंशन योजना का लाभ उठाया। मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक स्तर पर जांच कराई गई, जिसमें गड़बड़ी सामने आने की बात कही जा रही है। इसके बाद जिला प्रशासन ने संबंधित पेंशन पर रोक लगाते हुए दिव्यांग कार्ड निरस्त कर दिए हैं।
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| शिकायती पत्र देने के बाद खड़े शिकायकर्ता। |
बताया जा रहा है कि सुमित सिंह और उसके परिवार के सदस्यों ने फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्रों के आधार पर करीब 2 लाख 40 हजार रुपये की पेंशन का लाभ लिया। सरकारी योजना में कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। हालांकि पेंशन रोकने और दिव्यांग कार्ड निरस्त करने की कार्रवाई के बावजूद फर्जी प्रमाणपत्र बनवाने तथा सरकारी धन का कथित रूप से लाभ लेने के मामले में आरोपी के खिलाफ अभी तक कोई ठोस कानूनी कार्रवाई सामने नहीं आई है। इसे लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। गौरतलब है कि सुमित सिंह पर पहले से ही एक दर्जन से अधिक लोगों को नौकरी दिलाने का झांसा देकर लाखों रुपये की कथित ठगी करने के आरोप हैं। आरोप है कि उसने अलग-अलग लोगों को स्वास्थ्य विभाग, पुलिस विभाग और संविदा नौकरी दिलाने का भरोसा देकर रकम ली, लेकिन नौकरी नहीं लगवाई। इस मामले में उसके खिलाफ अलग-अलग थानों में कुल आठ मुकदमे दर्ज बताए जा रहे हैं। इनमें थरियांव थाने में पांच, खागा कोतवाली में दो और मलवां थाने में एक मुकदमा दर्ज बताया गया है। अब फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र के जरिए पेंशन लेने का मामला सामने आने के बाद आरोपी की मुश्किलें और बढ़ती दिखाई दे रही हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर फर्जी प्रमाण पत्र कैसे जारी हुए और कई वर्षों तक उनके आधार पर सरकारी पेंशन का भुगतान कैसे होता रहा। प्रमाण पत्रों के सत्यापन में लापरवाही किस स्तर पर हुई, इसकी भी जांच की जरूरत है। मामला थरियांव थाना क्षेत्र से जुड़ा होने के कारण अब लोगों की नजर प्रशासन और पुलिस की अगली कार्रवाई पर टिकी है।


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