चित्रकूट, के एस दुबे : अतिवर्षा के बाद फसलों और पशुधन पर पड़े प्रभाव का जायजा लेने दीनदयाल शोध संस्थान द्वारा संचालित कृषि विज्ञान केंद्र गनिवां के वैज्ञानिकों एवं कार्यकर्ताओं ने प्रभावित गांवों का भ्रमण किया। टीम ने बघौड़ा, बसिला, भौंरी, तौरा, नांदी और खरसेड़ा समेत अन्य गांवों में किसानों से संपर्क कर खेतों में जलभराव और फसलों की स्थिति का प्रत्यक्ष निरीक्षण किया। जमीनी आकलन में अरहर, मूंग और तिल की फसल को अतिवर्षा से नुकसान की स्थिति सामने आई। वैज्ञानिकों ने किसानों को खेतों में उचित जल निकासी की व्यवस्था
करने तथा मौसम के अनुरूप फसल प्रबंधन की सलाह दी। भौंरी क्षेत्र में तिल की फसल के निरीक्षण के दौरान फाइलोडी, पत्ती धब्बा रोग और बालदार सूंडी का प्रकोप भी पाया गया। विशेषज्ञों ने किसानों को प्रारंभिक अवस्था में रोग-कीट की पहचान कर समय से नियंत्रण करने के उपाय बताए।
टीम ने पशुधन की स्थिति भी देखी। कुछ पशुओं में खुरपका-मुंहपका और लम्पी स्किन डिजीज के लक्षण मिले। इस पर पशुपालन विभाग से संपर्क कर स्वास्थ्य परीक्षण, उपचार और टीकाकरण की व्यवस्था कराने का प्रयास किया जा रहा है। कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. राजेंद्र सिंह नेगी के नेतृत्व में वैज्ञानिक पुष्पेंद्र सिंह दीक्षित, रोहित कुमार मिश्रा, कार्यकर्ता अभय कुमार व सुरेश ने किसानों को आवश्यक जानकारी दी। कृषि वैज्ञानिक उत्तम कुमार त्रिपाठी ने बताया कि बुधवार को तौरा में पशुपालन शिविर आयोजित किया जाएगा, जिसमें पशुओं का स्वास्थ्य परीक्षण और रोग नियंत्रण संबंधी जानकारी दी जाएगी।


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