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Monday, September 28, 2026

रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज में कथित भ्रष्टाचार पर बवाल

15 सूत्रीय मांगों को लेकर उच्चस्तरीय जांच की मांग

बांदा, के एस दुबे । रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज में कथित भ्रष्टाचार, अनियमितताओं और आउटसोर्सिंग कर्मियों के शोषण को लेकर चल रहा विवाद अब और गहरा गया है। पिछले 8 दिनों से जारी आमरण अनशन के बाद जनता दल यूनाइटेड एवं स्थानीय नागरिकों द्वारा प्रशासन को 15 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपकर मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई है। ज्ञापन में मेडिकल कॉलेज की पूरी कार्यप्रणाली, अधिकारियों की भूमिका, ड्यूटी-रोस्टर, बायोमीट्रिक उपस्थिति और कर्मचारियों के प्रशासनिक तबादलों पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।सौंपे गए ज्ञापन में प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार हेतु कई अहम बिंदु रखे गए हैं।शाजिया बेगम एवं सावित्री यादव


को मेट्रन कार्यालय के दायित्वों से हटाकर प्रशासनिक आधार पर स्थानांतरित करने की मांग।कार्यवाहक सीएमएस डॉ. प्रवीण राज सरावगी की भूमिका व कार्यप्रणाली की निष्पक्ष जांच। वरिष्ठ सीएमएस डॉ. रजनी भारती से नियमानुसार कार्य लेने और किसी योग्य वरिष्ठ नर्सिंग ऑफिसर को मेट्रन का दायित्व सौंपने की मांग। मेडिकल कॉलेज व जिला अस्पताल में ड्यूटी-रोस्टर और बायोमीट्रिक उपस्थिति में कथित धांधली की अभिलेखीय जांच की मांग की गई है। इसके अलावा, आउटसोर्सिंग कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाते हुए निम्नलिखित मांगें रखी गई हैं।आउटसोर्सिंग कर्मियों का आर्थिक व मानसिक शोषण बंद हो, समय पर वेतन दिया जाए और नौकरी से निकालने की धमकियों पर रोक लगे। आउटसोर्सिंग कर्मियों से स्थायी कर्मचारियों का कार्य न लिया जाए तथा उनसे अतिरिक्त ड्यूटी न करवाई जाए। कर्मचारियों को उनकी योग्यता, पद और वरिष्ठता के अनुरूप ही जिम्मेदारी सौंपी जाए।वर्षों से एक ही पटल पर जमे अधिकारियों व कर्मचारियों के स्थानांतरण की मांग के साथ-साथ पूर्व में हुई भ्रष्टाचार संबंधी शिकायतों और जांच आख्याओं की पुनर्समीक्षा कराने की बात कही गई है। ज्ञापन में स्पष्ट किया गया है कि निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए मजिस्ट्रेटियल जांच टीम का गठन किया जाए। इससे न केवल अनशन पर बैठीं श्रीमती शालिनी सिंह पटेल के स्वास्थ्य की रक्षा हो सकेगी, बल्कि बांदा की आम जनता को भी पारदर्शी व गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी। अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन के अगले कदम और इस संबंध में शुरू होने वाली संभावित विभागीय कार्रवाई पर टिकी हैं।


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