कार्रवाई नहीं हुई तो फिर आमरण अनशन करेंगी शालिनी सिंह पटेल
बांदा, के एस दुबे । रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज बांदा की 15 सूत्रीय मांगों को लेकर एक बार फिर प्रशासन को पांच दिन का अल्टीमेटम दिया गया है। शालिनी सिंह पटेल, प्रदेश उपाध्यक्ष जेडीयू एवं संगठन प्रभारी बुंदेलखंड ने कहा कि मुख्य चिकित्सा अधिकारी बांदा, कार्यवाहक प्रधानाचार्य डॉ. सुनील कौशल जी, अपर जिलाधिकारी बांदा धर्मेंद्र कुमार जी, सीओ सिटी बांदा सौरभ सिंह जी एवं उपजिलाधिकारी सदर बांदा नवीन प्रसाद की मौजूदगी में जनता और मीडिया के सामने मांगों को लेकर चर्चा हुई थी तथा तीन अक्टूबर को रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज बांदा में बैठक भी हुई, जिसमें 15 सूत्रीय मांगों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अभी तक धरातल पर कोई ठोस काम दिखाई नहीं दे रहा है। शालिनी सिंह पटेल ने कहा कि रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज बांदा में
नर्सिंग मैटरन कार्यालय में सजिया खान द्वारा ताला लगाए जाने की बात सामने आई है, वहीं सीनियर नर्सिंग ऑफिसर वीना त्रिपाठी गार्ड की कुर्सी पर बैठकर कार्यालय का काम करने को मजबूर हैं, जबकि प्रधानाचार्य द्वारा वीना त्रिपाठी को वरिष्ठता के आधार पर मैटरन रखने के संबंध में पत्र दिया गया है। उन्होंने कहा कि डॉ. रजनी भारती रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज की सीएमएस हैं, लेकिन उनके अवकाश पर होने के दौरान डॉ. प्रवीण सरावगी की भूमिका को लेकर स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए। शालिनी सिंह पटेल ने आरोप लगाया कि डॉ. प्रवीण सरावगी स्वयं को सीएमएस बताते हैं, जबकि सीएमएस के पद पर डॉ. रजनी भारती का नाम दर्ज है। इसी प्रकार मुकेश बंसल की प्रशासनिक भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। शालिनी सिंह पटेल ने सवाल उठाया कि आखिर मेडिकल कॉलेज प्रशासन सजिया खान के मामले में कार्रवाई करने से क्यों बच रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सूत्रों से ऐसी जानकारी मिल रही है कि ड्यूटी लगाने और हटाने तथा बिना ड्यूटी वेतन दिए जाने को लेकर अनियमितताएं हो रही हैं। शालिनी सिंह पटेल ने कहा कि उनके पास इन मामलों से संबंधित साक्ष्य उपलब्ध हैं और आवश्यकता पड़ने पर वह उन्हें संबंधित अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत करेंगी। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। शालिनी सिंह पटेल ने कहा कि अधिकारियों को पांच दिन का समय दिया जा रहा है। यदि पांच दिन के भीतर 15 सूत्रीय मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई और मेडिकल कॉलेज की व्यवस्थाओं में सुधार नहीं किया गया तो वह पुनः आमरण अनशन पर बैठने के लिए मजबूर होंगी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा, जनता और मरीजों के हित में धरातल पर कार्रवाई करनी होगी।


No comments:
Post a Comment