डेढ़ लाख रुपये मांगने और मुकदमे में फंसाने की धमकी का आरोप, न्याय न मिलने पर आंदोलन करेंगे पत्रकार संगठन
बांदा, के एस दुबे । पत्रकार रामकिशोर उपाध्याय की शिकायत पर एडीजी जोन ज्योति नारायण ने गंभीरता दिखाते हुए डीआईजी चित्रकूटधाम मंडल को अपनी निगरानी में पूरे प्रकरण की बिंदुवार जांच कराने के निर्देश दिए हैं। शुक्रवार को प्रयागराज में एडीजी से मुलाकात कर पत्रकार ने प्रार्थनापत्र सौंपा और न्याय की गुहार लगाई। मामले में उच्चस्तरीय जांच के निर्देश के बाद पुलिस महकमे में हलचल तेज हो गई है। उधर, बांदा के पत्रकार संगठनों ने भी आवाज बुलंद करते हुए न्याय न मिलने पर आंदोलन की चेतावनी दी है। मामला मुकदमा संख्या 187/2026 से जुड़ा है। पत्रकार रामकिशोर उपाध्याय ने क्षेत्राधिकारी नरैनी प्रवीण यादव पर डेढ़ लाख रुपये की कथित मांग करने, दबाव बनाने और रकम न देने पर मुकदमे में फंसाकर जेल भेजने की धमकी देने के गंभीर आरोप लगाए हैं। पत्रकार का दावा है कि उसके पास कॉल रिकॉर्डिंग, व्हाट्सऐप चैट, स्क्रीनशॉट और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य मौजूद हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच से पूरे प्रकरण की सच्चाई सामने आ सकती है।
शिकायत के मुताबिक, दो सितंबर को पत्रकार ने कथित पीड़ित अनुज कुमार की वीडियो बाइट और हलफनामा सोशल मीडिया तथा पत्रकारों के व्हाट्सऐप ग्रुपों में प्रसारित किया था। पत्रकार का कहना है कि वीडियो में अनुज कुमार ने मुकदमे में लगाए गए मारपीट, गाली-गलौज और जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल के आरोपों से इनकार करते हुए कार्रवाई की इच्छा नहीं होने की बात कही थी। इसके बाद कथित तौर पर दोबारा बयान दर्ज कराए गए और पत्रकार के खिलाफ भी आरोप सामने आए।
पत्रकार ने अपनी शिकायत में यह भी दावा किया है कि मुकदमे से जुड़े एक प्रार्थनापत्र पर कथित पीड़ित के हस्ताक्षर नहीं हैं। इसके अलावा, पत्रकार ने आरोप लगाया कि दो से 11 सितंबर के बीच सीओ के गनर के मोबाइल और संबंधित व्हाट्सऐप नंबर के जरिए रुपये मांगने का दबाव बनाया गया। उसने पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराकर कॉल विवरण, चैट, कथित प्रार्थनापत्र, हलफनामे और वीडियो की तकनीकी जांच कराने की मांग की है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
एडीजी से मुलाकात के दौरान पत्रकार ने प्रकरण के सभी पहलुओं की जांच, कथित उत्पीड़न से सुरक्षा और आरोप प्रमाणित होने पर संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ विधिक एवं विभागीय कार्रवाई की मांग रखी। एडीजी ने डीआईजी चित्रकूटधाम मंडल को अपनी निगरानी में बिंदुवार जांच कराने के निर्देश दिए हैं। अब जांच में यह स्पष्ट होना है कि रुपये मांगने और धमकी देने के आरोपों में कितनी सच्चाई है तथा मुकदमे से जुड़े दस्तावेजों और बयानों में कोई अनियमितता हुई या नहीं। इधर, बांदा में पत्रकार संगठनों ने भी मामले को लेकर तेवर सख्त कर लिए हैं। संगठनों का कहना है कि पत्रकारों के खिलाफ होने वाली किसी भी कार्रवाई की निष्पक्षता और वैधानिकता की जांच होनी चाहिए। यदि खबर प्रसारित करने के कारण किसी पत्रकार को दुर्भावनापूर्ण तरीके से निशाना बनाया गया है, तो यह गंभीर मामला है। पत्रकार संगठनों ने चेतावनी दी है कि पीड़ित पत्रकार को न्याय नहीं मिला तो आंदोलन किया जाएगा। मामले को संबंधित उच्चाधिकारियों और भारतीय प्रेस परिषद के समक्ष भी उठाने की बात कही गई है। अब पूरे प्रकरण में निगाहें एडीजी की निगरानी में होने वाली जांच पर टिकी हैं। पत्रकार संगठनों ने स्पष्ट किया है कि उनकी लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच, पत्रकारों की स्वतंत्रता और कानून के निष्पक्ष अनुपालन के लिए है। आरोपों की पुष्टि जांच और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही हो सकेगी, लेकिन एडीजी के निर्देशों से मामले की निष्पक्ष जांच की उम्मीद बढ़ी है।


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