चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि : जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली डॉ. गीता देवी मिश्रा (बुआ जी) के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर परिचर्चा के साथ बुधवार को श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस दौरान नवनियुक्त कुलपति प्रो. आरएन त्रिपाठी ने उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण और पूजन कर श्रद्धांजलि अर्पित की। कुलाधिपति के निजी सचिव रमापति मिश्रा, कुलसचिव मधुरेंद्र कुमार पर्वत सहित विश्वविद्यालय परिवार के सदस्यों ने भी पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया। सभा में रमापति मिश्रा ने बुआ जी की कार्यशैली से जुड़े संस्मरण साझा किए। इस दौरान वह भावुक हो गए। कुलपति प्रो. त्रिपाठी ने कहा कि डॉ. गीता देवी मिश्रा त्याग, तपस्या, निष्ठा और सेवा की साक्षात प्रतिमूर्ति थीं। गुरुदेव की संकल्पनाओं को साकार करने में
उनकी अहम भूमिका रही। उनके समर्पण से ही गुरुदेव के विभिन्न प्रकल्प संचालित होते रहे और विश्वविद्यालय 23 वर्षों तक उनकी कथाओं के माध्यम से निरंतर आगे बढ़ता रहा। आज यह राज्य विश्वविद्यालय के रूप में विश्व में विशिष्ट पहचान रखता है। उन्होंने कहा कि वह गुरुदेव के संकल्पों के अनुरूप विश्वविद्यालय के विकास और दिव्यांगजनों की शिक्षा एवं पुनर्वास के लिए पूरी निष्ठा से कार्य करेंगे। शिक्षकों और कर्मचारियों से भी उन्होंने बुआ जी की कार्यशैली से प्रेरणा लेकर कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वहन करने का आह्वान किया। संचालन डॉ. गोपाल कुमार मिश्रा ने किया। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. महेंद्र कुमार उपाध्याय ने किया। इस मौके पर विनीत पाण्डेय सहित सम्बन्धित शिक्षकगण आदि मौजूद रहे।


No comments:
Post a Comment