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Monday, September 4, 2023

निस्वार्थ मेहनत और लगन से बुलंदी पर शिक्षक कृष्णपाल

राज्य अध्यापक पुरस्कार से मुख्यमंत्री कर चुके हैं पुरस्कृत 

उत्कृष्ट विद्यालयों के वीडियो में भी उच्च प्राथमिक विद्यालय गोखिया को मिली जगह 

अतर्रा, के एस दुबे । निरंतर और निस्वार्थ होकर किसी भी क्षेत्र में किया गया कार्य एक दिन आपको समाज की बुलंदियों पर ले जाता है। इसका जीता जाता उदाहरण है उच्च प्राथमिक विद्यालय गोखिया में कार्यरत अध्यापक कृष्णपाल सिंह। अतर्रा हिंदू इंटर कालेज में प्रवक्ता रहे पूरन सिंह के पुत्र कृष्ण पाल सिंह को उत्कृष्ट कार्याे के लिए वर्ष 2022 में राज्य अध्यापक पुरस्कार से मुख्यमंत्री द्वारा पुरस्कृत किया गया। इनके ही विद्यालय को हाल ही में जारी उत्तर प्रदेश सरकार के उत्कृष्ट विद्यालयों के वीडियो में भी स्थान प्राप्त हुआ है। वर्ष 2002 में इस विभाग में सहायक अध्यापक के रूप में जुड़े कृष्णापाल सिंह वर्तमान समय पर गोखिया में 2011 से पदोन्नति के उपरांत से कार्यरत हैं। इनके द्वारा विद्यालय में ब्लाक की प्रथम प्रोजेक्टर संचालित स्मार्ट क्लास, एस्ट्रोनॉमी लैब, विज्ञान लैब,

बच्चों के साथ खड़े शिक्षक कृष्णपाल सिंह 

कंप्यूटर लैब सहित पांच हजार पुस्तकों से सुसज्जित रीडिंग कार्नर युक्त पुस्तकालय भी स्थापित किया गया। विद्यालय को निपुण लक्ष्य प्राप्ति के लिए समाज में जागरूकता व सजगता लाने के लिए विद्याालय को एक ट्रेन का स्वरूप देकर निपुण भारत एक्सप्रेस नाम दिया गया। विद्यालय में भौतिक परिवेश को पूर्ण करने के लिए वह कायाकल्प में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए इनको वर्ष 2022 में जिलाधिकारी द्वारा उत्कृष्ट शिक्षक व कायाकल्प में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए भी पुरस्कृत किया गया। वर्ष 2006-07 में बालकों की बास्केटबाल टीम बनाकर जनपद बांदा का प्रतिनिधित्व करते हुए राज्य स्तर पर उप विजेता का खिताब भी जीता। साथ ही मंडल व जनपद स्तर पर अनेक खेलकूद प्रतियोगिताओं में इनके बच्चों द्वारा स्थान प्राप्त किया गया। विद्यालय में बच्चों को विशेष रूप से बालिकाओं के लिए जूडो,सिलाई कढ़ाई के प्रशिक्षण की व्यवस्था व स्काउट प्रशिक्षण की व्यवस्था की गई। इस संबंध में शिक्षक श्री सिंह ने कहा कि उनका हमेशा से उद्देश्य रहा है कि ग्रामीण अंचल के किसान, गरीब और कमजोर वर्ग के ऐसे बच्चे जो की शहरो में जाकर के अच्छे-अच्छे कान्वेंट स्कूलों में शिक्षा नहीं ग्रहण कर पाते हैं, ऐसे बच्चों के लिए ग्रामीण स्तर पर ही एक ऐसे विद्यालय में व्यवस्था की जाए जो की अच्छे-अच्छे कान्वेंट स्कूलों में व्यवस्था नहीं हो पाती। इसके लिए वह समय-समय पर सुविधाओं सहित अपने समस्त स्टाफ के एक मीटिंग करते हुए सभी के सहयोग से विद्यालय में शैक्षणिक व भौतिक परिवेश में एक ऐसा परिवर्तन लाने के लिए प्रयासरत रहते हैं जो की बच्चों के सर्वांगीण विकास में सहयोग कर सकें। साथ ही विद्यालय के भौतिक परिवेश के विकास हेतु किसान,व्यापारी सहित अनेक सामाजिक संस्थाओं व बैंकों से सहयोग मांगा गया और उनको समय-समय पर विद्यालय का विजिट भी कराया गया ताकि वह देख सके की उनके द्वारा दिए गए सामग्री या सहयोग का उपयोग बच्चों के विकास के लिए निरंतर किया जाता रहा है। धीरे-धीरे समाज से इतना सहयोग मिला कि उन्हें सभी के सहयोग से आज विद्यालय को उत्कृष्ट बनाने का प्रयास सफल होने की कगार पर है। 


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