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Thursday, October 24, 2024

जीवन में ऐसे कार्य जरूर करें, ताकि आपको भी मिले मेडल : राज्यपाल

21 में से 16 छात्राओं को राज्यपाल ने विभिन्न संकायों में दिए मेडल

विवि में बोटेनिकल गार्ड व फसलोत्तर प्रबंधन प्रयोगशाला का राज्यपाल ने किया लोकार्पण

बांदा, के एस दुबे । कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय बांदा में गुरुवार को दसवां दीक्षांत समारोह हुआ। जिसमें मुख्य अतिथि महामहिम राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने छात्र-छात्राओं को मेडल और डिग्रियां दी। उन्होंने कहा कि आज के दौर में महिलाएं कृषि, वानिकी और उद्यान क्षेत्र में तरक्की कर रही हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड में खेती की अपार संभावनाएं हैं। दीक्षांत समारोह में शिरकत करने पहुंचीं राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने सबसे पहले कृषि विश्वविद्यालय बोटेनिकल गार्डन व फसलोत्तर प्रबंधन प्रयोगशाला का लोकार्पण किया। इसके अलावा उन्होंने मेडिटेश्न एंड वेलनेश सेंटर का शिलान्यास किया। राज्यपाल ने कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के दसम दीक्षांत समारोह का शुभारम्भ किया तथा दीक्षांत समारोह में विभिन्न संकायों में स्वर्ण, रजत एवं कांस्य पदक छात्र-छात्राओं को पदक प्रदान किये। इससे पूर्व उन्होंने बाॅदा कृषि विश्वविद्यालय बोटेनिकल गार्डन एवं फसलोक्तर प्रबन्धन प्रयोगशाला का लोकार्पण किया तथा मेडिटेशन एण्ड वेलनेश सेन्टर (केन नेचर पार्क) का शिलान्यास किया।

गुरुवार को कृषि विवि में छात्राओं के साथ राज्यपाल आनंदी बेन पटेल

दीक्षान्त समारोह में राज्यपाल व कुलाधिपति आनन्दी बेन पटेल ने छात्र-छात्राओं को मेडल प्राप्त होने पर उनको और उनके माता-पिता को बधाई देते दी। कहा कि पिछले दो वर्षों कृषि विश्वविद्यालयों में छात्राओं ने उल्लेखनीय प्रगति करते हुए अधिक मेडल प्राप्त किये हैं। आज इस विश्वविद्यालय में 21 में से 16 छात्राओं को विभिन्न संकायों में मेडल प्राप्त हुए हैं। उन्होंने कहा कि जिन छात्र-छात्राओं को आज मेडल नही मिला है, वह सभी अपने जीवन के लिए इतना अच्छा कार्य करें, जिससे उन्हें भी मेडल प्राप्त हो सके। राज्यपाल ने कहा कि महिलायें सभी क्षेत्रों में आगे बढ़ रही हैं और कृषि, वानिकी, उद्यान के क्षेत्र में भी आगे बढ़कर मेडल प्राप्त कर रही हैं। उन्होंने कहा कि केन्द्र व प्रदेश सरकार द्वारा संचालित तकनीकी एवं अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं को किसानों, महिलाओं, स्वयंसेवी संस्थाओं तक अवश्य पहुंचाये, जिससे वह स्वावलंबी और सशक्त हो सकें। प्रधानमंत्री का सपना है कि स्वयं सहायता समूह की सखियां लखपति एवं ड्रोन दीदियां कैसे बनें, इस दिशा में कार्य निरन्तर किये जा रहे हैं।

दीक्षांत समारोह को संबोधित करतीं राज्यपाल आनंदीबेन पटेल

उन्होंने कहा कि किसानों को वैज्ञानिक ढंग से उन्नतशील खेती करें तथा उर्वरकों एवं रसायनिक छिडकाॅव आदि का उपयोग कम करें और प्राकृतिक खेती की ओर आगे बढें। बुन्दलेखण्ड क्षेत्र में कृषि क्षेत्र की अपार सम्भावनायें हैं जिस ओर विश्वविद्यालय पूर्णतया प्रयत्नशील है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय को दलहन, तिलहन मिशन के अन्तर्गत मूंगफली, सरसों, अलसी, तिलहन में आत्मनिर्भर बनने के लिए कार्य करें। उन्होंने जल संरक्षण के लिए तालाबों का निर्माण कराये जाने पर जोर दिया। इसके साथ ही किसानों को कृषि कार्य के साथ बागवानी, पशुपालन, मत्स्य पालन को भी अपनायें जिससे उन्हें लाभ होगा। उन्होंने कहा कि कृषि को आगे बढाने के लिए हर सम्भव प्रयास करना होगा। उन्होंने कहा कि कृषि उत्पाद को बढायें, कृषि क्षेत्र में अलग-अलग योजनायें बनाकर कार्य करें। उन्होंने कहा कि किसानों के बीच में बैठकर कृषि के विषय में वैज्ञानिक जानकारी दें ताकि किसान कृषि कार्य, वैज्ञानिक और उन्नतिशील तरीके से करके अपना उत्पादन बढ़ा सकें। कृषि विश्व विद्यालय में पांच महाविद्यालय कृषि, उद्यान, वानिकी, सामुदायिक विज्ञान एवं कृषि अभियांत्रिकी एवं तकनीकी संचालित हैं तथा कृषि अभियांत्रिकी एवं खाद्य प्रौद्योगिकी में स्नातक डिग्री कार्यक्रम का शैक्षणिक कार्य शुरू किया गया है, जिससे छात्र/छात्राओं को कृषि क्षेत्र के अध्ययन में सुविधा होगी। उन्होंने कहा कि आंगनबाडी केन्द्रों में बच्चों की स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिये जाने तथा स्वच्छता के बारे में बच्चों की आदत डलवाये जाने के साथ बच्चों हेतु उपयोगी सामग्री की किट उपलब्ध कराये जाने के साथ बच्चों के लिए खिलौनो की सामग्री गरीब बच्चों को छोटी साइकिल, कुर्सी, मेज, किताब, स्टेशनरी किट आगनवाडी कार्यकत्रियों को वितरित किया। उन्होंने आंगनबाडी के बच्चों को विश्वविद्यालय से जोडकर उन्हें बेहतर बनाने का कार्य किया जा रहा है, जिससे कि गरीब परिवारों के बच्चों का आंगबाडी केन्द्रों के माध्यम से शिक्षा एवं स्वास्थ्य में सुधार हो सके। कार्यक्रम में उन्होंने राजभवन से प्राप्त पुस्तकों के सेट का वितरण विद्यालय के अध्यापकों को किया। इसके साथ ही उन्होंने परिषदीय विद्यालयों मे आयोजित अन्र्तविद्यालय भाषण प्रतियोगिता एवं कहानी कथन प्रतियोगिता, चित्रकला प्रतियोगिता में विजयी बच्चों को प्रमाण पत्र वितरित किये।

दीक्षांत समारोह में स्नातन व परास्नातक में मेडल प्राप्त करने वाले मेधावी छात्र-छात्राओं को उपाधियां प्रदान की गयी, जिसमें कृषि संकाय, उद्यान, वानकी, सामुदायिक विज्ञान संकाय, पीएचडी कृषि एवं उद्यान संकाय के छात्र/छात्राओं को बीएससी, एमएससी व पीएचडी की उपाधियां प्रदान की गयीं, जिसमें वैष्णवी सिंह को स्वर्ण पदक और होम सांइस में कुलपति स्वर्ण पदक भेंट किया। कु. समीक्षा को कृषि स्नातक में स्वर्ण पदक, आलोक कुमार को रजत पदक, चन्द्रगुप्त मौर्य को कांस्य पदक प्रदान किया गया। उद्यान स्नातक में सौरभ दत्ता को स्वर्ण पदक, शिवांगी पाण्डेय को रजत पदक, मेघालाल को कांस्य पदक प्रदान किया गया। वानिकी क्षेत्र में सीजल साहू को स्वर्ण, ऋतिका को रजत, मुस्कान सिंह को कांस्य पदक प्रदान किया गया। गृह स्नातक में श्रृद्धा यादव को रजत, प्रगति सिंह को कांस्य पदक प्रदान किया गया। कृषि परास्नातक में मानसी शुक्ला को स्वर्ण पदक, स्तुति मौर्या को रजत पदक, दीक्षा सिंह को कांस्य पदक तथा उद्यान परास्नातक में जयश्री सिंह को स्वर्ण पदक, जागृति पाठक को रजत पदक, पीयूष प्रताप कुशवाहा को कांस्य पदक प्रदान किया गया। वानिकी परास्नातक में शिवम राघव को स्वर्ण पदक, साम्भवी अवस्थी रजत पदक तथा प्रशांत कुमार को कांस्य पदक प्रदान किया गया। कार्यक्रम में नरेन्द्र प्रताप सिंह, आयुक्त चित्रकूटधाम मण्डल बालकृष्ण त्रिपाठी, पुलिस उप महानिरीक्षक अजय कुमार सिंह, डीएम नगेन्द्र प्रताप, एसपी अंकुर अग्रवाल, कुलसचिव डाॅ. एसके सिंह, विधायक नरैनी ओममणि वर्मा सहित एडीएम राजेश कुमार, प्रबन्ध परिषद एवं विद्वत परिषद के सम्मानित सदस्यगण, आमंत्रित अतिथिगण, आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां, विश्वविद्यालय के सभी शिक्षक एवं कर्मचारीगण, छात्र एवं छात्राएं, उपस्थित रहे।

खाद्यान्न उत्पादन बढ़ाने की आवश्यकता : हरिश्चंद्र

बांदा। दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि डाॅ. हरिश्चन्द्र गुप्ता ने कहा कि बुन्देलखण्ड में कृषि क्षेत्र को बढ़ाने के साथ खाद्यान उत्पादन बढ़ाने की आवश्यकता है, जिससे कि इस क्षेत्र की ग्रामीण अर्थ व्यवस्था की उन्नति हो सके। बुन्देलखण्ड में मोटे अनाजों की खेती को पुनर्जीवित करने के लिए सार्थक प्रयास किये जा रहे हैं। शिक्षा की गुणवत्ता बढाने तथा कुशल मानव संसाधन विकास के लिए उच्च संस्थानों के साथ समन्वय स्थापित कर कार्य करें, जिससे हमारा विश्वविद्यालय विश्व रैकिंग की प्रतिस्पर्धा में शामिल हो सके। उन्होंने सौर्य उर्जा आधारित फसलों की सिचाई को बढावा देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अलसी व तिल की नयी प्रजातियों के विकसित होने से तिलहन उत्पादन में वृद्धि होगी। श्रीअन्न की खेती एवं दलहन, तिलहन की खेती के लिए यह क्षेत्र उपयोगी है। उन्होंने कृषि क्षेत्र में और अधिक शोध कार्यों को किये जाने तथा ग्रामीण कृषि अनुसंधान को और प्रभावी किये जाने पर जोर दिया। कार्यक्रम में कुलपति डॉ. नरेन्द्र प्रताप सिंह द्वारा विश्वविद्यालय द्वारा कृषि क्षेत्र में किये जा रहे कार्यों तथा शोध कार्यों के सम्बन्ध में जानकारी दी गयी।


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