गैंगेस्टर अदालत ने सुनाई सजा, पांच-पांच हजार का लगाया जुर्माना
बांदा, के एस दुबे । गैंगस्टर कोर्ट ने दो शातिर माफियाओं को दोषी उप्र गिरोहबंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप निवारण अधिनियम, 1986 के तहत दोषी करार देते हुए दोनों अभियुक्तों को सात-सात वर्ष के कठोर कारावास की सजा एवं 5000-5000 रुपए के अर्थदंड से दंडित किया है। अर्थदंड अदा न करने पर दोनों को तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। विशेष लोक अभियोजक (गैंगस्टर एक्ट) सौरभ सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि तत्कालीन कोतवाली प्रभारी निरीक्षक विवेकानंद तिवारी द्वारा 10 अक्टूबर 2011 को प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। जिसमें अभियुक्त जावेद उर्फ बुद्धू पुत्र जाकिर अली, निवासी लोहार तलैया तथा असलम पुत्र बाबू हनीफ निवासी खाईपार के विरुद्ध धारा 2/3 गैंगस्टर एक्ट के तहत अभियोग पंजीकृत किया गया था। अभियोजन के अनुसार अभियुक्तों का एक संगठित आपराधिक गिरोह है, जिसका सरगना जावेद उर्फ बुद्धू है जबकि असलम
![]() |
| अधिवक्ता सौरभ सिंह |
उसका सक्रिय सदस्य है। यह गिरोह अवैध असलहों के बल पर हत्या, हत्या का प्रयास, लूट, डकैती, चोरी व राहजनी जैसे संगीन अपराधों को अंजाम देकर अवैध धन अर्जित करता रहा है। जावेद उर्फ बुद्धू के विरुद्ध 5 से अधिक, जबकि असलम के विरुद्ध 4 संगीन मुकदमे पहले से दर्ज हैं। इस मामले की विवेचना निरीक्षक हवलदार सिंह द्वारा की गई। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से चार गवाहों को न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। प्रभावी पैरवी, साक्ष्यों के गहन अवलोकन एवं ठोस अभियोजन के आधार पर अपर सत्र विशेष न्यायाधीश (गैंगस्टर कोर्ट) एडीजे प्रदीप कुमार मिश्रा ने दोनों अभियुक्तों को दोषी मानते हुए यह सजा सुनाई। विशेष लोक अभियोजक सौरभ सिंह ने बताया कि वर्ष 2011 में इस गिरोह ने दो लोगों की गोली मारकर हत्या की थी, जिसका मुकदमा अभी भी न्यायालय में विचाराधीन है।


No comments:
Post a Comment