दादी प्रकाशमणि का स्मृति कार्यक्रम हुआ आयोजित
आत्मा एवं परमात्मा के मिलन का नाम राजयोग
बांदा, कृपाशंकर दुबे । प्रजापिता ब्रम्हाकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय सिंहवाहिनी मंदिर कटरा में दादी प्रकाशमणि का स्मृति कार्यक्रम आयोजित किया गया। केंद्र संचालिका ब्रम्हाकुमारी गीता बहन ने आध्यात्मिक रहस्य को बताते हुए कहा कि ज्ञान के तीसरे नेत्र द्वारा परमात्मा को पहचाना जा सकता है। परमपिता परमात्मा शिव,
पवित्रता और सुख शांति लेकर सबके जीवन में आए परमात्मा के कार्य में सभी सहयोगी बनें एवं अपने को संपूर्ण पवित्र बनाने की प्रतिज्ञा करें। ब्रम्हाकुमारी शालिनी बहन ने बताया कि मानवता की मंगलमयी भावना ही शिव की कृति है। शिव अनंत है। शिव सार्वभौमिक एवं सर्वकालिक है। वह ही पतितों का पालन करने वाले मनुष्य मात्र को शांति सुखधाम की राह दिखाने वाले विकारों व काल के बंधन से छुड़ाने वाले एवं सभी प्राणियों पर रहम करने वाले हैं। शिव दिव्य बुद्धि के दाता व दिव्य दृष्टि के वरदाता हैं। लोगों के अंदर मन की चेतना जगाने की जरूरत है। क्योंकि प्रभु के दरबार में सबका लेखाजोखा रहता है। उन्होंने कहा कि राजयोग भारत का प्राचीनतम योग है। यह आत्मा में व्याप्त दुख और पाप के पांच मूल कारण काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार को दूर करने वाला एक मात्र योगाभ्यास है, जो मन को मोह या अहंकार से मुक्त कर सकें। इसलिए मन को स्वस्थ और प्रसन्न रखने वाला योग ही यथार्थ योग है। इससे जीवन से सच्ची सुख-शांति व खुशी आती है। राजयोग आत्मा एवं परमात्मा के मिलन का नाम है। क्योंकि परमात्मा सभी गुणों एवं शक्तियों का केंद्र है। इस मौके पर गीता, शालिनी, सुनैना, दिलीप, कैलाश उपस्थित रहे।


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