कानपुर नगर, हरिओम गुप्ता- भारत में शिक्षा का स्तर विश्व के अन्य देशों से काफी कम है लेकिन मुस्लिम समुदाय की स्थित शिक्षा के क्षेत्र में अत्यंत दयनीय है। भारत में सिफ 25 प्रतिशत महिलाएं ही स्नातक है यह जानकारी अनुदानित मुस्लिम बालिकाओं की बोसिक शिक्षा समस्याओं पर आधारित एक सेमिनार में वक्ताओं ने दी, जिसका आयोजन शिवराजपुर में किया गया।
वक्ताओं ने कहा जहां कई देश शिक्षा स्तर में हमसे आगे है वहीं भारत में शिक्षा का स्तर अत्यन्त निम्न है और भारत में मुस्लिमों की शिक्षा में भागदारी अत्यंत कम है जो समस्यात्मक है। जहां तक बालिका शिक्षा की बात है तो भारत में मुसलमान अल्पसंख्यक है लेकिन शिक्षा के क्षेत्र में मुस्लिम बालिकांए मुस्लिमों में भी अल्पसंख्यक है। बताया भारत में मुस्लिम बालिकाएं परिवार और समुदाय के दबाव में आकर हाई स्कूल तक आते आते अपनी शिक्षा बंद कर देती है। इस समाज में मदरसा शिक्षा और आधुनिक शिक्षा के बीच की खाई बढती जा रही है। कहा गया कि आवश्यकता है कि आधुनिक शिक्षा और मदरसों को एक प्रभावशाली कडी से जोडा जाये जिससे मुस्लिम समुदाय को देश के अन्य अग्रेषित समुदाय के बराबर लाया जा सके। कहा गया वर्तमान केंद्र व राज्य सरकार की योजनाए बहुत प्रभावकारी है, इनसे अल्पसंख्यक समाज शिक्षा के क्षेत्र में अत्यंत विकास करेगा। कार्यक्रम में मनोज पांडे, विशाल प्रेम नारायण वर्मा, शिव नारायण त्रिपाठी, सूर्य प्रकाश तिवारी, आलोक कुमार दुबे, महेश कुमार आदि लोगो ने संबोधित किया। कार्यक्रम का आययोजन अभिषेक कठेरिया ने किया।


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