अन्ना प्रथा से परेशान किसानों ने खंड विकास अधिकारी को सौंपा ज्ञापन
कमासिन, कृपाशंकर दुबे । बांदा अन्ना प्रथा की रोकथाम के लिए शासन द्वारा भले ही पर्याप्त धन उपलब्ध कराकर अन्ना जानवरों से किसानों को राहत दिए जाने का प्रयास किया गया हो, लेकिन आज हालात जस के तस हैं। इन जानवरों से तंग किसान कभी सार्वजनिक स्थानों कहीं शासकीय इमारतों पर अन्ना जानवरों को बंद कर
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| इस तरह अन्ना मवेशियों का झुंड खेतों में बोलता है धावा |
अपना विरोध प्रकट कर रहे हैं, वही शासन के नुमाइंदे बेगुनाह किसानों को गुनहगार मानकर कानूनी शिकंजा कस रहे हैं। कस्बे के तंग किसानों ने अन्ना प्रथा के विरुद्ध खंड विकास अधिकारी को ज्ञापन सौंपा है।
अन्ना प्रथा से तंग किसानों ने रामानुज यादव किसान नेता की अगुवाई में दर्जनों किसानों ने मिलकर खंड विकास अधिकारी डा. प्रभात कुमार द्विवेदी को ज्ञापन सौंपते हुए कहा है कि शासन-प्रशासन के लगातार आदेशों के बावजूद जवाबदेह विभागों व संस्थाओं के कर्मचारियों द्वारा अन्ना प्रथा पर अभी तक कोई लगाम नहीं लगाई जा सकी है। अन्ना जानवरों के कारण किसानों के खेतों में लगाई गई लाखों की लागत से फसलें अन्ना घूम रहे जानवर बर्बाद कर रहे हैं। अपनी फसलें चैपट होता देख किसान के माथे की लकीरें साफ बयां कर रही हैं कि उनकी मेहनत पर पानी फिर रहा है। निराशा से जुड़े किसान आए दिन स्कूलों सरकारी भवनों पर अन्ना जानवरों को बंद कर अपना विरोध प्रकट कर रहे हैं, फिर भी शासन द्वारा कारगर जरूरी कदम न उठाए जाने के कारण किसान परेशान हाल है। जिम्मेदार अधिकारी अपनी जवाबदेही से बचने के लिए इन्हीं निर्दोष किसानों के विरुद्ध एफआईआर पंजीकृत कर ब्रिटिश कालीन हुकूमत की यादें ताजा कर रहे हैं। ज्ञापन लेते वक्त खंड विकास अधिकारी श्री द्विवेदी से किसान नेता रामानुज यादव ने पूछा कि अन्ना जानवरों से किसानों को कब निजात मिल पाएगी, खंड विकास अधिकारी श्री द्विवेदी ने कहा कि शासन के निर्देशों पर गांव-गांव अस्थाई पशु बाडो का निर्माण किया जा रहा है, जिनको अतिशीघ्र ही संचालित कराकर अन्ना जानवरों से किसानों को निजात दिलाने का प्रयास जारी है।


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