एम्बुलेन्स चालकों की लगातार हड़ताल से मुसीबत में जिन्दगी - Amja Bharat

Amja Bharat

All Media and Journalist Association

Breaking

Tuesday, September 24, 2019

एम्बुलेन्स चालकों की लगातार हड़ताल से मुसीबत में जिन्दगी

108 व 102 की 85 गाड़ियों के चक्के जाम 
निजी वाहनों से अस्पताल पहुंच रहे गम्भीर मरीज 

फतेहपुर, शमशाद खान । पांच सूत्रीय मांगों को लेकर रविवार की आधी रात से 108 व 102 के चालकों द्वारा शुरू की गयी हड़ताल दूसरे दिन भी मंगलवार को जारी रही। वाहनों के पहिये थम जाने से गम्भीर घायलों के साथ-साथ प्रसव पीड़ित महिलाओं की जिन्दगी मुसीबत में पड़ गयी है। हड़ताल के चलते निजी वाहन चालकों की चांदी कट रही है। जरूरतमंद लोग निजी वाहनों से स्वास्थ्य सेवाएं लेने के लिए मजबूर हैं। उधर हड़ताली चालकों का कहना है कि जब तक उनकी मांगे पूरी नहीं होंगी हड़ताल यथावत जारी रहेगी। 
प्रदर्शन करते हड़ताली कर्मचारी एवं निजी वाहन से अस्पताल आया मरीज।  
बताते चलें कि पांच सूत्रीय मांगों को लेकर 108 व 102 एम्बुलेन्स गाड़ियों के चालक बेमियादी हड़ताल पर चले गये हैं। चालकों के अपने वाहनों को जीटी रोड स्थित विज्ञान भवन के मैदान में खड़े कर रखे हैं। जीवनदायनी कही जाने वाली एम्बुलेन्स चालकों के हड़ताल पर चले जाने से सेहत महकमे में हड़कम्प मचा हुआ है। हड़ताली कर्मचारियों का कहना है कि जब तक उनकी पांच सूत्रीय मांगों को कम्पनी नहीं मानती तब तक यह हड़ताल जारी रहेगी। उनका कहना है कि कम्पनी पिछले तीन महीने से वेतन नहीं दे रही है और समय से बारह घण्टे काम भी ले रही है। जिसके चलते उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कर्मचारियों की मांगों में पायलट प्रोजेक्ट के तहत 108 एम्बुलेन्स सेवा के चालक तथा ईएमटी को 100 रूपये तथा 102 एम्बुलेन्स के कर्मचारियों को 60 रूपये प्रति केस दिये जाते हैं। केस न मिलने पर दिहाड़ी तक नहीं मिलती है। इसलिए कर्मचारी पायलट प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे हैं। वहीं स्थाई कर्मचारियों को जो मासिक वेतन मिलता है वह भी समय से नहीं मिलता। इसके अलावा लम्बे समय से वेतन में बढ़ोत्तरी न किये जाने से भी कर्मचारी नाराज हैं। कर्मचारियों की हड़ताल से सड़क हादसों में घायल होने वाले गम्भीर व्यक्तियों के साथ ही प्रसव के लिए अस्पताल आने वाली महिलाओं को सर्वाधिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। दिक्कतों के अलावा इन हालातों में निजी वाहनों की सेवाएं लेने पर आर्थिक बोझ भी पड़ रहा है। हड़ताली कर्मचारियों का कहना है कि कम्पनी द्वारा लागू की गयी पायलट प्रोजेक्ट योजना को तत्काल बंद किया जाये। निकाले गये कर्मचारियों को तत्काल वापस लिया जाये। हड़ताल का सर्वाधिक असर ग्रामीण क्षेत्रों में पड़ रहा है। 

No comments:

Post a Comment

Post Bottom Ad

Pages