देवेश प्रताप सिंह राठौर
(वरिष्ठ पत्रकार)
..................हम आतंकवाद की बात करते हैं उसमें हमारे विचार हैं आतंकवाद बाहरी देश पाकिस्तान से आया हुआ हो या बांग्लादेशदेशहमारी सेना हमारे देश की सरकार उनसे निपटने में पूर्ण रूप से सक्षम है ।वह आपने इस समय कश्मीर के हालात को देखकर समझ गए होंगे कि आतंकवाद जड़ से नष्ट होने की स्थिति में पहुंच गया है।
लेकिन हमारे घर के अंदर जो आतंकवाद है जो गुंडा है माफिया डॉन हैं उनको कैसे इस देश से उनसे निजात मिलनी बहुत जरूरी है क्योंकि अपने हर क्षेत्र में गुंडागर्दी कारण अपनी पैठ बनाए रहते हैं और कोई सांसद होता है कोई विधायक होता है सफेद पोसी राजनीति में आकर अंदर घर के अंदर गुंडागर्दी राजनीति पुलिस के संरक्षण से खूब तेजी से चलती है। फिर वही पुलिस वही राजनीतिक दल उसी के लिए घातक बन जाता है और अंत में उसे मारने के लिए कार्यवाही शुरू होती है जब वह सरदार पुलिस के लिए बन जाता है उसका पतन होने का कारण होता है।पहले हम घर के अंदर के आतंकवाद को समाप्त करें बाहरी आतंकवाद खत्म करने के लिए हमारी सेना पूर्ण रूप से सक्षम है।देश में आजादी के 73 साल हो गए हैं लेकिन हम अब तक आतंकवाद और नक्सलवाद जैसी गंभीर समस्याओं पर काबू नहीं पा सके हैं। भले ही हमारा देश तेज गति से विकास करने वाला देश बन गया हो, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी अपनी एक अलग पहचान बनी हो, मगर बात जब आतंकवाद और नक्सलवाद पर काबू पाने की होती है तो हम अपने हाथ पूरी तरह खाली पाते हैं। क्या कभी हम आतंकवाद पर अमेरिका की तरह लगाम लगा पाएंगा ।भारत में आतंकवाद की शुरुआत उसी दिन से हो गई थी जब नागा विद्रोहियों ने अपना झंडा बुलंद किया था। उसके बाद यह आग त्रिपुरा, मणिपुर, मिजोरम होते हुए पंजाब तक पहुंच गई। किसी तरह सख्ती करके पंजाब के आतंकवाद पर काबू पाया, पर देश से आतंकवाद पूरी तरह खत्म नहीं हो सका जबकि आतंकवाद और आतंकवादियों की चूल हिलाने की ताकत हमारी सुरक्षा एजेंसियों के पास भी अमेरिका से कम नहीं है, लेकिन हमारे पास आतंकवाद से निबटने के लिए कोई स्पष्ट नीति नहीं है ।राजनीतिक अवसरों और मौकों के हिसाब से राजनेताओं को जो रास्ता सरल लगा, उसे अपना लिया गया। इसमें सबसे आसान रास्ता था आतंकवादियों के मांगों के आगे अपना सिर झुकाना।कभी विश्वनाथ प्रताप सिंह ने रूबैया के लिए आतंकवादियों की मांगें मान लीं तो कभी कंधार-कांड के लिए वाजपेयी सरकार आतंकवादियों को उनके घर तक छोड़ आई। जब तक हम आतंकवादियों की मांगों के आगे झुकते रहेंगे, वे हमारे निर्दोष लोगों की जान ऐसे ही लेते रहेंगेदरअसल, आतंकवाद को कानूनी दृष्टि से देखने की जरूरत है जबकि अभी तक हमारी सरकार इसे केवल गैर-कानूनी काम मानती है। यह मान लिया गया है कि यदि कहीं कोई आतंकवादी घटना हुई है तो यह गैर-कानूनी काम है। जिस तरह हमारे देश में आतंकवादी घटनाएं बढ़ रही हैं, उन्हें देखते हुए आतंकवाद की कानून में अलग व्याख्या होनी चाहिए और उसकी अलग परिभाषा होनी चाहिए। पोटा में आतंकवाद का उल्लेख किया गया था, पर कानूनी दृष्टि से अब भी आतंकवाद कोई जुर्म नहीं है। आतंकवाद एक ऐसी समस्या बन गई है जो भारत से सटे देश बंगला देश , पाकिस्तान, चीन आज बहुत से ऐसे देश हैं जो आतंकवाद को सुनते हुए क्या काम करते हैं भारत में आतंकवाद फैलाने का मुख्य कारण पाकिस्तान जो हमेशा भारत की आतंकवादी गतिविधियां करता रहता है।.....=हम बात करते हैं अंदर के आतंकवाद को जैसे भारत में बहुत बड़े डाकू गुंडे गैंगस्टर माफिया जो हमेशा लोगों का खून पीते रहते हैं घर के अंदर मतलब भारतवर्ष में इन गद्दारों से आतंकवादियों से पहले निपटने की जरूरत है जैसे विकास दुबे को आपने देखा है किस तरह 1 हफ्ते के घटनाक्रम में उनका अंत हुआ आतंक का अंत होना पक्का है। क्योंकि भगवान भी उसकी मदद नहीं करते हैं इतनी हत्या वह कर चुका होता है इतने दुष्कर्म यह होता है कि भगवान भी उसे नहीं ऐसे व्यक्तियों का साथ नहीं देते हैं। हमें पहले अंदर के आतंकवाद को खत्म करना है भारत का बाहरी आतंकवाद खत्म करने के लिए हमारी सेना पूर्ण रूप से सक्षम है और पतन की कगार पर कश्मीर में आतंकवाद हो चुका है। आज भारत देश घर के अंदर जो आतंकवाद का रूप धारण किए हुए हैं चाहे वह घरेलू हो चाय हो पाकिस्तान बांग्लादेश के द्वारा आतंकवाद को सीमा के अंदर घुस कर नुकसान पहुंचाने का काम करना उनकी धारणा बन गई है। आपने देखा आजादी के बाद जब भारत पाकिस्तान आजाद हुआ पाकिस्तान मैं 15 परसेंट हिंदू थे आज 1% से अधिक हिंदू रह गए हैं। पाकिस्तान मैं अभी आपने देखा होगा मंदिर निर्माण का कार्य के बारे में जानकारी प्राप्त हुई मीडिया चैनलों द्वारा लेकिन वहां पर (पाकिस्तान) मैं जिस तरह वहां के कट्टरपंथियों ने मंदिर नहीं बनने दिया और वहां पर जाकर जो नींव भरी हुई थी उसे पाकिस्तान के कट्टरपंथी ने किस तरह और किन किन शब्दों का ईश्वर के प्रति धारणा क्या है उनकी यह आपने देखा जबकि सृष्टि के रचयिता एक हैं मानने के तरीके अलग अलग नाम से धर्म के आधार पर ईश्वर की आस्था बनी हुई है चाहे हिंदू हो चाहे मुसलमान हो चाहे सुख हो चाहे इसाई हो चाहे बौद्ध धर्म के हो सभी मानव के स्वरूप एक अंग के होते हैं ऐसा नहीं किसी के अल्लाह है तो उन्होंने इंसान के बनाने के तरीके में भिन्नता ही हैं सभी धर्म को अलग अलग बनाने वाले लोग मानव का स्वरूप एक हैं । हम आपस में लड़ते हैं मंदिर मस्जिद के नाम पर आप 5 दिन में नमाज अदा करते हैं क्या नमाज पढ़ने पर और आपके कुरान में यह लिखा है कि हम आतंकवाद के रूप में तथा मंदिर और मस्जिद के रूप में लड़ाई झगड़ा करेंगे और आतंकवाद से फैलाएंगे क्या ईश्वर हो चाय अल्लाह, या ईसा मसीह, या वाहेगुरु हूं। सब इंसान का रूप है किसी धर्म में ईश्वर के प्रति आस्था के नाम तो बदले गए हैं लेकिन व्यक्ति के अंगों में सभी धर्मों के भगवानों ने मानव की संरचना एक तरह की है। कब एक तरह हैं तो विवाद करने की जरूरत क्यों पड़ती है जो लोग किसी के धर्म का अपमान करके अपने को आगे बढ़ने का काम करते हैं उसका पतन निश्चित है। आज भारत के अंदर गुंडा माफिया पूर्व सरकारों के माध्यम से बहुत बड़ा नेटवर्क भारत में तैयार हुआ देश का एक तेरा जैसा है बिहार बिहारी माफियाओं के लिए महफूज राज है लालू प्रसाद यादव जी ने 20,एवम् 25 वर्षों बिहार में सरकार रही बिहार को गुंडा माफियाओं का सेवड़ा बिहार राज्य गुंडा मोतियों के लिए महफूज रहने के लिए एक स्थान देश में बिहार के रूप में मिला सरकार बदली नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने आज बहुत कुछ बिहार में सुधार हुआ है। मेरा कहने का मकसद यह है हम लोगों के धर्म हम एक हैं भगवानों के नाम बदले हैं लेकिन भगवान एक है किसी भी धर्म जात का अपमान नहीं करना चाहिए सम्मान करना चाहिए जो लोग इसका पालन नहीं करते हैं वह शीघ्रपतन के रास्ते पर अपना रास्ता बना लेते हैं।


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