ग्रामोदय यूनिवर्सिटी में तुलसी जयंती पर हुई बेब संगोष्ठी
चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि। महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के तत्वावधान में कुलपति प्रो नरेश चंद्र गौतम के मार्गदर्शन में संत तुलसीदास की जयंती पर वेब संगोष्ठी का आयोजन हुआ। इस मौके पर बतौर मुख्य अतिथि जेआर दिव्यांग विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो योगेश चंद्र दुबे मौजूद रहे। अध्यक्षता अभियांत्रिकी और प्रौद्योगिकी संकाय के अधिष्ठाता डॉ आंजनेय पांडेय ने की। वेब संगोष्ठी की परिकल्पना कला संकाय के अधिष्ठाता प्रो वाईके सिंह ने की। हिंदी विभागाध्यक्ष और उप कुलसचिव डॉ कुसुम कुमारी सिंह संयोजक और डॉ ललित कुमार सिंह, प्राध्यापक हिंदी आयोजन सचिव रहे।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि कुलपति प्रो योगेश चंद्र दुबे ने सन्त तुलसीदास के व्यक्तित्व और कृतित्व पर चर्चा करते हुए विभिन्न शोधों के निष्कर्षों को प्रस्तुत किया। उन्होंने तुलसी की कृति श्री रामचरितमानस के चैपाई, दोहा और सोरठा की काव्यमयी प्रस्तुति में कहा कि तुलसी का सामाजिक दर्शन लोकजीवन के सकारात्मक परिणामो को प्रदर्शित ही नही करता बल्कि मर्यादित जीवन शैली भी बताता है। अध्यक्षता कर रहे डॉ आंजनेय पांडेय ने कहा कि तुलसीदास द्वारा रचित रामचरितमानस सामाजिक दर्पण की आधार प्रष्ठभूमि है। अभियंत्रिकी कौशल द्वारा मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने अपने राज्य मेंप्राकृतिक आपदाओं जैसे अतिवृष्टि, अनावृष्टि, बाढ़, आग आदि घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाया था। दैहिक ताप जन्नत बीमारियां, जो दूषित जल, दूषित हवा से फैलते हैं
उसके बचाव स्वस्थ जीवन शैली का प्रसार किया था। आम जनों की भौतिक आवश्यकताओं की प्रतिपूर्ति के लिए काम हुआ था। विषय प्रवर्तन करते हुए डॉ कुसुम सिंह ने कहा कि तुलसीदास की मानस गंगा आज घर-घर तक पहुंची है। तुलसीदास ने लोक साहित्य का सृजन कर उसे जन-जन तक पहुंचाया। प्रसन्नता है कोरोना संक्रमण काल मे ग्रामोदय विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग द्वारा श्री तुलसी जयंती पर कार्यक्रम की परम्परा नही टूटी और वेब संगोष्ठी के माध्यम से इस बार ज्यादा सफल रहे। आयोजन सचिव डॉ ललित कुमार सिंह में तुलसी की अनेक कृतियों की विशेषताओं पर प्रकाश डाला। डॉ वंदना पाठक, डॉ स्वर्ण लता शर्मा,डॉ राममूर्ति त्रिपाठी आदि ने इस दौरान अपने विचार व्यक्त किए। आभार प्रदर्शन डॉ नीलम चैरे परीक्षा नियंत्रक ने किया। यह जानकारी जन संपर्क अधिकारी जयप्रकाश शुक्ला ने दी है।
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| गोष्ठी में विचार रखते विद्वतजन। |


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