भाद्रपद मास में शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को अनंत चतुर्दशी कहा जाता है। इसे अनंत चौदस के नाम से भी जाना जाता है। इस वर्ष अनंत चतुर्दशी का यह व्रत 1 सितंबर को रखा जाएगा। चतुर्थी तिथि 31 अगस्त को प्रातः 8:48 से प्रारम्भ हो कर 1 सितम्बर को प्रातः 9:38 तक ळे इस दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा करने और अनंत सूत्र को बांधने से जीवन की सभी समस्याओं से मुक्ति मिलती है। अनंत सूत्र में चैदह गाँठें होती हैं। अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश विसर्जन भी किया जाता है इसलिए इस पर्व का महत्व और भी बढ़ जाता है।
महाभारत काल से अनंत चतुर्दशी व्रत की शुरुआत हुई। अनंत भगवान ने सृष्टि के आरंभ में चैदह लोकों की रचना की थी। इन लोकों का पालन और रक्षा करने के लिए वह स्वयं भी चौदह रूपों में प्रकट हुए थे, जिससे वे अनंत प्रतीत होने लगे। इसलिए अनंत चतुर्दशी का व्रत भगवान विष्णु को प्रसन्न करने और अनंत फल देने वाला माना गया है। इस दिन व्रत रखने श्री विष्णु सहस्त्रनाम स्तोत्र का पाठ करने से समस्त मनोकामना पूर्ण होती है। धन-धान्य, सुख-संपदा और संतान आदि की कामना से यह व्रत किया जाता है।
चतुर्दशी पूजा का शुभ मुहूर्त प्रातः 5:46 से प्रातः 9:38 तक है
- ज्योतिशाचार्य एस.एस. नागपाल, स्वास्तिक ज्योतिष केन्द्र, अलीगंज, लखनऊ


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