आश्विन मास में पितृ पक्ष मनाया जाता है। पितरों की आत्मा की शांति के लिए पितृ पक्ष में तर्पण और पिंडदान को सर्वोत्तम माना गया है। इस वर्ष दो आश्विन मास है शुद्ध आश्विन मास और अधिक आश्विन मास श्राद्ध 2 सितंबर से शुरू होंगे और 17 सितंबर को समाप्त होंगे। इसके अगले दिन 18 सितंबर से अधिकमास शुरू हो जाएगा, जो 16 अक्टूबर तक चलेगा। अधिमास लगने से नवरात्र और पितृपक्ष के बीच एक महीने का अंतर आ जायेगा.चातुर्मास जो हमेशा चार महीने का होता है, इस बार पांच महीने का होगा. वहीं नवरात्रि पर्व 17 अक्टूबर से शुरू होगा और 25 अक्टूबर को समाप्त होगा। चतुर्मास देवउठनी के दिन 25 नवंबर को समाप्त होंगे। चतुर्मास की समाप्ति के बाद से ही विवाह, मुंडन एवं अन्य प्रकार के मांगलिक कार्य शुरू होंगे।
अधिकमास- भारतीय हिंदू कैलेंडर सूर्य मास और चंद्र मास की गणना के अनुसार चलता है। अधिकमास चंद्र वर्ष का एक अतिरिक्त भाग है, इसका प्राकट्य सूर्य वर्ष और चंद्र वर्ष के बीच अंतर का संतुलन बनाने के लिए होता है। भारतीय गणना पद्धति के अनुसार प्रत्येक सूर्य वर्ष 365 दिन और करीब 6 घंटे का होता है, वहीं चंद्र वर्ष 354 दिनों का माना जाता है। दोनों वर्षों के बीच लगभग 11 दिनों का अंतर होता है, जो हर तीन वर्ष में लगभग 1 मास के बराबर हो जाता है। इसी अंतर को संतुलन के लिए हर तीन साल में एक चंद्र मास अस्तित्व में आता है, जिसे अतिरिक्त होने के कारण अधिकमास का नाम दिया गया है।
- ज्योतिशाचार्य एस.एस. नागपाल, स्वास्तिक ज्योतिष केन्द्र, अलीगंज, लखनऊ


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