कोरोना काल में मनाया गया रक्षाबंधन पर्व
चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि। जिले में रक्षाबंधन का त्योहार हर्षोल्लासपूर्ण माहौल में मनाया गया। बहनों ने भाईयों की कलाई में राखी बांधकर रक्षा का वचन लिया। पर्व के दिन सवेरे से मिठाई वा राखियों की दुकानों में भीड़ देखने को मिली।
भाई-बहन का त्योहार रक्षाबंधन के दिन सवेरे से लड़कियां व महिलायें नदी-तालाबों में पहुंचकर कजलिया विसर्जन किया। मंदिरों में भगवान को कजलिया अर्पण करने के बाद बहनों ने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर कलाई में रक्षासूत्र बांध रक्षा करने का वचन लिया। भाईयों ने भी बहनों को यथाशक्ति उपहार भेंटकर उन्हें वचन निभाने का संकल्प किया। भाई-बहनों ने एक-दूसरे को मीठा खिलाया। इसी क्रम में तीर्थ क्षेत्र चित्रकूट के विधवा आश्रम की विधवाओं ने प्रमुख देवता कामतानाथ को राखी बांधकर त्योहार मनाया। सवेरे से ही मुख्यालय में जगह-जगह टेंट लगाकर राखी वा मिठाईयों की दुकाने सजी रहीं। जहां राखी व मीठा खरीदने के लिये लोगों की भीड लगी रही। कोरोना के चलते कहीं त्योहार फीका न पड़ जाये, किन्तु सवेरे बदली छाये रहने के बावजूद लोग घरों से निकलकर खरीददारी की और त्योहार का लुत्फ उठाया। पर्व पर मऊ, मानिकपुर, पहाडी, राजापुर, सीतापुर समेत पूरे जिले में भाई-बहन के अटूट प्रेम का त्योहार हर्षोल्लासपूर्ण माहौल में मनाया गया। इस अवसर पर लडकियों ने पेड़ों पर झूला डालकर गीत गाते हुये झूले का आनन्द उठाया। भागवत रत्न आचार्य नवलेश दीक्षित ने परम्परा के बारे में जानकारी देते हुये बताया कि भाई-बहन के लिये रक्षाबंधन का त्योहार का शुभ मुहूर्त आया है। यह मुहूर्त भाई-बहन के अटूट प्यार का प्रतीक होगा।
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| कजलिया विसर्जित करतीं |
अवकाश के दिन डाक कर्मियों ने दी सेवाएं
चित्रकूट। डाक कर्मियों ने बहनो द्वारा भेजी गई राखी रजिस्टर्ड डाक से भेजी। जिसे डाक कर्मियों ने रविवार और सोमवार को भी खोज-खोज कर लोगों के घर तक पहुंचाया। पता चला है कि डाक विभाग ने रक्षाबंधन के त्योहार को देखते हुए रविवार और सोमवार गजटेड अवकाश को भी काम करने का आदेश दिया था। जिसके चलते त्योहार के दिन भी डाक कर्मियों ने बहनो द्वारा भेजी गई भाईयों को राखी प्राप्त हुई। यदि ये डाक कर्मी रविवार और सोमवार को डाक का वितरण न करते तो त्योहार के बाद ही भेजी गई राखियां पहुंच पाती। इस वर्ष रक्षाबंधन का त्योहार श्रावण मास के सोमवार को पड़ने के कारण अति सौभाग्यकारी माना गया है। बहने इसीके चलते अपने भाईयों की कलाई में रक्षासूत्र बांधने में अपने को भाग्यशाली समझीं। भाई और बहन के असीम प्यार का त्योहार रक्षाबंधन है। कोरोना वायरस के चलते भी बहनो ने अपने भाईयों की कलाई में राखी बांधने में अग्रणी भूमिका निभाई। यही त्योहार भाई और बहन के प्रेम का वर्ष में एक बार आता है। जिसे विधिवत मनाया गया।
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| भाई की कलाई में राखी बांधती बहनें। |
बाजार में कम रही रौनक
चित्रकूट। कोरोना वायरस के चलते इस वर्ष रक्षाबंधन तथा बकरीद के त्योहार पर अधिक खरीददारी नहीं हो सकी। हिन्दु और मुस्लिम भाईयों ने फिर भी त्योहार मनाने की औपचारिकताएं पूरी की। इस वर्ष मेवा, मिष्ठान के अलावा अन्य त्योहार की सामग्री मंहगी रही। जिससे खरीददारी अधिक नहीं हो पाई। वहीं कारोबारियों ने अपनी दुकानें खोली, लेकिन खरीददारों की कमी रही।
रक्षाबंधन के समय कजलिया का महत्व
चित्रकूट। रक्षाबंधन के दिन जिस तरह रक्षासूत्र का महत्व है उसी प्रकार कजलियों का भी महत्व है। बहने अपने भाईयों के कानो के बगल में कजलियों को रखकर दीर्घायु की कामना करती हैं। वहीं कई आचार्यों ने बताया कि कजलिया रोग, शोक और रक्षा से भी रक्षा करती है। बताया कि प्रत्येक धार्मिक कार्य प्रारंभ करने के पूर्व जौ व गेंहू बोया जाता है। उससे निकलने वाले पौधे को कजलिया एक माह तक कहा जाता है। यह पौधा किसी भी प्रकार की बाधा उत्पन्न नहीं होने देता। इसी कारण रक्षाबंधन के दिन 15 दिन पूर्व बोई गई कजलिया को निकालकर नदी, तालाब में कुछ हिस्सा विसर्जित कर कुछ हिस्सा साथ लाकर ईष्ट देव को समर्पित करने के पश्चात भाईयों के कानो में रखकर दीर्घायु व मंगल की कामना करती है। रक्षाबंघन के दिन कजलियों का भी विशेष महत्व है।
पार्थिव शिवलिंग बनाकर किया रुद्राभिषेक
चित्रकूट। सावन के अंतिम सोमवार को शिव भक्तों ने घरों में पार्थिव शिवलिंग बनाकर विधिविधान से रुद्राभिषेक कर पूजन अर्चन किया। भगवान शिव से प्रार्थना किया कि कोरोना संकट से निजात करें। लोगों ने घरों में खीर बनाकर सावन की विदाई की।
कोरोना के चलते नहीं बांध सकीं राखी
चित्रकूट। कोरोना संक्रमण के चलते बहनो ने बाजारों में मिष्ठान खरीदने में विशेष ध्यान रखकर बारीकी से पूछताछ के बाद ही खरीदा। दूरदराज रहने वाली बहने भाईयों की कलाई में राखी बांधने से वंचित रह गई। कोरोना वायरस को कोसती रहीं। इसके अलावा घरों में विभिन्न प्रकार के पकवान बनाने में सकुचाते रहे। हालाकि प्रदेश सरकार ने आवागमन के लिए महिलाओ, बहनो के लिए विशेष छूट देते हुए बसो से फ्री आवागमन की घोषणा की थी। जिससे नजदीक के क्षेत्रों से तो आवागमन हुआ, लेकिन अन्य प्रांतों में रहने वाली बहने अपने भाईयों की कलाई में रक्षासूत्र मांगने से वंचित रह गई। फोन पर ही रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दे सकीं।
जिला कारागार में भी दिखा असर
चित्रकूट। कोरोना संकट के चलते इस बार जिला कारागार में रक्षाबंधन का पर्व मनाने में गुरेज किया गया। बीते वर्ष बहनो ने जाकर भाईयो के हाथो में राखी बांधकर त्योहार मनाते रहे है, लेकिन इस बार रक्षासूत्र नहीं बांध सकीं।
संक्रमण के दौर में बरती सावधानी
चित्रकूट। रक्षाबंधन में इस वर्ष कोरोना संक्रमण के चलते बाजारों में विशेष रौनक नहीं दिखी। कुछेक राखी व मिठाई की दुकानो में ही भीड रही। लेोग संक्रमण के भय के चलते पूर्व की भांति कम ही घरों से बाहर निकले। वाहनों में भी भीड देखने को नहीं मिली। नजदीकी रिश्तेदारियों में ही लोग पहुंचे।
हाट स्पाट में पाबंदियों के बीच मनाया त्योहार
चित्रकूट। कोरोना संक्रमित हाट स्पाट क्षेत्रो में पाबंदियों के बीच लोगों ने रक्षाबंधन का त्योहार मनाया। हालाकि जरूरी सामग्री खरीदने को लोग मास्क आदि लगाकर बाहर निकले। घर वापसी पर सेनेटाइजर आदि से हाथ धुलने के बाद पूरी सावधानी बरती।
निगरानी में रही पुलिस
चित्रकूट। त्योहार के मद्देनजर पुलिस अधीक्षक अंकित मित्तल के निर्देश पर विभिन्न क्षेत्रों में पुलिस बल तैनात रहा। हाट स्पाट क्षेत्रों में निगरानी रखी गई।



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