अन्ना प्रथा मुक्ति मोर्चा ने सौपा ज्ञापन
चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि। किसानों की आय दोगुनी करने के लिए केंद्र सरकार प्रतिबद्ध हैं, किंतु अन्ना प्रथा किसानों के साथ प्रधानमंत्री के सपनों पर पानी फेर रहा है। बुंदेलखंड कृषि प्रधान क्षेत्र है। इस क्षेत्र की दो तिहाई आबादी कृषि पर निर्भर है। सर्वाधिक सूखा प्रभावित क्षेत्र भी है। कई तरह की प्राकृतिक आपदाओं के चलते बुंदेलखंड कृषि विकास की दौड़ में काफी पीछे रह गया है। वर्षों की परंपरा अन्ना प्रथा तो अब एक भयंकर कुप्रथा का रूप ले चुकी है। जिसके चलते बुंदेलखंड का किसान जहां कृषि क्षेत्र में नित नए हो रहे प्रयोग से वंचित हो रहा है वहीं स्थिति इतनी गंभीर हो
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| ज्ञापन देने जाते किसान, पदाधिकारी। |
चुकी है कि किसान पलायन के लिए मजबूर होता जा रहा है। बुंदेलखंड में कृषि सुधार के लिए अनुकूल वातावरण तैयार हो इसके लिए क्षेत्रीय किसानों का एक समूह अन्ना प्रथा मुक्ति मोर्चा बुंदेलखंड के बैनर तले मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन मऊ उप जिला अधिकारी को सौंपा है। ज्ञापन में अन्ना प्रथा को बुंदेलखंड में हमेशा के लिए प्रतिबंधित, गौशालाओं के संचालन को अग्रिम बजट की व्यवस्था, ग्राम पंचायत पर चल रही विभिन्न प्रकार की योजनाओं की तर्ज में गौशाला में एक कर्मचारी, संचालन का उत्तरदायित्व, ग्राम पंचायत स्तर में रोजगार के नए अवसर स्रजन, गौशालाओं में अन्ना पशुओं के नस्ल सुधार कार्यक्रम को प्रभावी करने समेत गौपालकों को मानदेय आदि मांगें शामिल है।


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