जिला चिकित्सालय में ओपीडी बन्द, प्राइवेट अस्पतालों ने भी खींचा हाथ
जिंदगी की जंग से जूझ रहे लोग इलाज न मिलने से मौत के मुंह में समाने को मजबूर
फतेहपुर, शमशाद खान । कोरोना महामारी की रोकथाम के लिये सरकारी व्यवस्थाएं जहां नाकाफी है वहीं निजी संस्थाओं के पल्ला झाड़ लेने से स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। कोरोना की इस नई स्ट्रेन ने सरकार से लेकर वैज्ञानिकों तक के होश उड़ाकर रख दिये है। बचाओ के तमाम उपायों के बाद भी कोरोना संक्रमितों की संख्या में जहाँ इजाफा और मौत की संख्या बढ़ी है। वहीं बड़ी तादात में ऐसी भी मौत हो रही है जिनमें कोविड-19 की न तो पुष्टि हुई है और न ही उनका टेस्ट हुआ है। मरने वालों का आंकड़ा हर रोज चैंकाने वाला है। अकेले भिटौरा स्थित घाट पर अंतिम संस्कार करने वालों की संख्या तीस से पैंतीस तक पहुँच चुकी है जबकि पहले यह आंकड़ा पांच से लेकर सात शव के अंतिम संस्कार तक था। यही हाल कब्रिस्तानों का भी है। आम तौर पर जहां शहर के अलग-अलग कब्रिस्तानों में एक दो माह या तीन माह में एक शव दफनाने के लिये आता था वहीं अब हालात यह है कि अधिकतर कब्रिस्तानों में प्रतिदिन शव दफनाने के लिये आ रहे हैं। जनपद में असनी घाट, नौबस्ता घाट, भिटौरा
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| भिटौरा घाट पर जलते शव। |
घाट के अलावा नदियों के आस-पास रहने वाले लोग गांवों के निकट भी दाह संस्कार करते हैं। इसके अलावा शहर के कब्रिस्तान जिनमे घोड़े शाहीदन कब्रिस्तान, शांतीनगर, पीरनपुर, तुराब अली का पुरवा, अंसारगढ़, राईन कब्रिस्तान, गढ़ीवा समेत दर्जनों जगह मुस्लिम समाज के शव दफन करने वाले कब्रिस्तान है। जहां आम दिनों की अपेक्षा कई गुना ज्यादा शव अंतिम संस्कार या दफनाने के लिये आ रहे हैं। हर रोज बढ़ते मौत के आंकड़े भले ही सरकारी दस्तावेजों में कोरोना मरीजों के रूप के न अंकित हो या किसी अस्पताल में टेस्ट के बाद कोरोना का इलाज न लिया हो लेकिन बुखार सांस लेने में दिक्कत होने के बाद अस्पतालों द्वारा भर्ती से इनकार के बाद परिजन इधर उधर भटकते रहे और अंत में मरीज की सांसे हमेशा हमेशा के लिये थम गयीं। हर रोज हो रही इन मौतों के आंकड़े की न तो किसी तरह की गणना की जा रही है न ही मौतों की असली वजह तलाश करने की जरूरत समझी जा रही है। कोरोना की पुष्टि न होने की वजह से चिकित्सा विभाग और जिला प्रशासन इन मौतों को तो कोरोना मरीज के रूप में न तो दर्ज करेगा और न ही कोरोना प्रोटोकॉल दिया जायेगा। मरीजों की मौत की पुष्टि करने और संक्रमण को देखते हुए सगे सम्बन्धियों का टेस्ट किया जाना चाहिए लेकिन जिम्मेदार इस ओर देखना भी गंवारा नहीं कर रहे हैं। हर रोज एक जैसे हालात से गुजरने के बाद बढ़ रही मौतों की संख्या ने आम लोगो के दिलों में दहशत का माहौल बना दिया है और जिनके घरों में मौतें हुई है अस्पताल और डॉक्टरों के अनुभव को सुनने के बाद आमजन बेहद डरा हुआ महसूस कर रहा है। इलाज के अभाव में अपनों को खोने वालों का दंश अलग ही बयान करता है। आमजनों के मुंह पर बस यही सवाल है कि कोरोना आपदा में सरकारी अस्पतालों में ओपीडी क्यों बन्द कर दी गयी है आपातकालीन स्थिति में सरकारी अस्पताल मरीजों को भर्ती करने तक से इनकार कर रहे हैं। अब तो निजी चिकित्सालय भी इलाज से हाथ खड़े करके लोगों को मौत के मुंह में धकेलने का काम कर रहे हैं। ऐसे में आम आदमी का एक मात्र सहारा ईश्वर ही बच रहा है।


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