फतेहपुर, शमशाद खान । यातायात माह के रूप में नवम्बर माह भले ही प्रचारित हो लेकिन यातायात विभाग की नज़र में नवम्बर माह और उसकी उपयोगिता शून्य से अधिक नहीं है। शहर की यातायात व्यवस्था को बेहतर तरीके से संचालित करने के लिए पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार सिंह द्वारा ट्रैफिक पुलिस कर्मियों एवं उनकी सहायता के लिये होमगार्ड के जवान लगाये गये है लेकिन शहर की यातायात व्यवस्था के नाम पर धाक को तीन पात ही नज़र आ रहे है। यातायात विभाग के कर्मियों की मौजूदगी में ही शहर के सभी व्यस्ततम चौराहों एवं उनसे जुड़ी सड़कों पर जाम की समस्या से लोग पीड़ित होते हुए देखे जा सकते हैं। वहीं चौराहों पर तैनात यातायात के ज़िम्मेदार सिर्फ
| जाम में फंसे वाहन सवार। |
वाहनों की चेकिंग में ही मसरूफ दिखाई देते है। सड़कों पर जाम का कारण सड़कों पर आड़े तिरछे वाहनों की पार्किंग, यातायात नियमों की अवहेलना कर वाहनों को चलाने एवं बेतरतीब तरीके से सड़कों पर गाड़िया लेकर चलने के कारण रोडों पर आए दिन जाम की स्थिति बन जाती है। जिसे नियंत्रित करने के लिए यातायात विभाग की तैनाती की जाती है लेकिन यातायात नियंत्रित करने की जगह ट्रैफिक के ज़िम्मेदार केवल वाहनों की चेकिंग को ही केवल अपना कर्तव्य समझते है। इन्हें सड़को पर लगने वाला जाम दिखाई नहीं देता। जाम से हांफ रहे शहर के ट्रैफिक व्यस्था देखकर नवम्बर माह में मनाया जाने वाला यातायात माह भी बेमायने साबित हो रहा है।

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