स्वास्थ्य विभाग द्वारा की जा रही निरोधात्मक कार्रवाई
पंपलेट के माध्यम से लोगों को किया जा रहा जागरूक
बांदा, के एस दुबे । डेंगू का प्रकोप लगातार बढ़ता ही जा रहा है। गुरुवार को जिला अस्पताल में एक डेंगू पाजिटिव केस मिला। अप्रैल माह से लेकर अब तक कुल 147 डेंगू पाजिटिव केस पाए गए हैं। डेंगू पीड़ित को अस्पताल में भर्ती कर उसका उपचार किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा डेंगू को रोकने के लिए निरोधात्मक कार्रवाई की जा रही है।
मौसम में बदलाव के साथ डेंगू का असर कुछ कम तो हुआ है, लेकिन मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा होता जा रहा है। जिला मलेरिया अधिकारी की ओर से जारी एडवाइजरी में गुरुवार को एक और डेंगू पाजिटिव केस पाया गया। उसको जिला अस्पताल में भर्ती कर उपचार किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग निरोधातमक कार्रवाई के तहत हाउस इंडेक्स सर्वे, जल भाव वाले स्थानों पर लार्वा निरोधक दवा का छिड़काव एवं नगर पालिका के सहयोग से फागिंग काय्र एवं डेंगू से संक्रमित होने से बचाने के लिए जनमानस को पंपलेटके माध्यम से स्वास्थ्य शिक्षा दी जाती है। डेंगू व मलेरिया समेत अन्य संचारी रोगों के नियंत्रण के लिए स्वास्थ्य विभाग की 12 सदस्यीय टीम महेश गुप्ता, गोपाल यादव, बल्दू, संतोष, रामदेव कुशवंशी, बब्बू, प्रभात, परीक्षित द्विवेदी, सुनील सोनकर, विकास, रमेश कुमार, अवधेश, भानु प्रताप, अजय पटेल, सुरेश, दिव्यांशू के द्वारा कांशीराम कालोनी, हरदौली घाट में निरोधात्मक कार्रवाई की गई। कार्रवाई के दौरान अधिकतर सीमेंट की टंकी, फ्रिज की कंडेशन ट्रे, कूलर एडीज लार्वा धनात्मक पाए जा रहे हैं। गुरुवार को टीम के सदस्यों ने कुल 188 घरों का निरीक्षण किया। इसमें 763 पात्रों का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण में 11 घर व 13 पात्र एडीज लार्वा धनात्मक पाए गए। सभी एडीज लार्वा धनात्मक पाए गए पात्रों को खाली कराया गया। मच्छर जनित स्थिति के लिए दी गई नोटिस की संख्या 5 है। स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा जलभराव वाले स्थानों पर लार्वा निरोधक दवा का छिड़काव किया। टीम द्वारा जन समुदाय को डेंगू, मलेरिया एवं अन्य वेक्टर जनित रोगों की रोकथाम, नियंत्रण एवं बचाव के बारे में पंपलेट वितरण कर जानकारी दी गई।
- - सामान्य बुखार होने पर नजदीक के राजकीय चिकित्सा, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर रक्त की जांच एवं उपचार अवश्य कराएं। कोई भी बुखार डेंगू, मलेरिया हो सकता है।
- - घर के कूलर, बाल्टी घड़े तथा ट्रम का पानी साप्ताहिक अंतराल पर बदलते रहें।
- - घर के आसपास एवं गड्ढों में पानी एकत्रित न होने दें। पानी एकत्रित होने वाले स्थानों को मिट्टी से भर दें, यदि संभव न हो तो कुछ बूंद जले हुए मोबिल आयल को अवश्य डाल दें।
- - सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें। शरीर पर मच्छर निरोधक क्रीम, नीम तथा सरसों के तेल का लेप खुले भागों पर लगाएं। नीम की पत्ती का धुआं करें।
क्या न करें
- - घर के आसपास छत पर तथा आंगन में पड़े पुराने बर्तनों, टायर, कूलर फूलदान, गमले में पानी इकट्ठा न होने दें। घर के आसपास कूड़ एकत्रित न होने दें एवं सफाई पर ध्यान दें।
- - घर में यदि बुखार का रोगी है तो उसे बिना मच्दरदानी के न रहने दें अथवा ऐसे कमरे में रोगी की देखभाल करें जिसके खिड़की तथा दरवाजे पर जालियां लगी हों।
- - बुखार रोगी बिना रक्त जांच कराए दवा का इस्तेमाल न करें तथा खाली पेट दवा न खाएं।


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