शारीरिक, मानसिक, यौनिक व आर्थिक हिंसा की हुई पहचान
मंच से जुड़ी हैं 2500 युवतियां, प्रशिक्षणों से बनाया सशक्त
बांदा, के एस दुबे । महिला सशक्तीकरण के क्षेत्र में काम कर रही समाजसेवी संस्था वनांगना ने वर्ष 2004 में शुरू किए गए गुफ्तगू मंच से 2500 किशोरियां व युवतियां जुड़ी हैं। 50 युवतियां अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर रही हैं। मंच के माध्यम से सामाजिक मुद्दों पर इनकी समझ को मजबूत बनाने का काम किया जा रहा है। यह बातें हाथीखाना स्थित संस्था कार्यालय में प्रेस वार्ता के दौरान पुष्पा शर्मा (डायरेक्टर) ने कहीं। उन्होंने बताया कि वनांगना चित्रकूट व बांदा जनपद में विगत वर्षों से समाजिक न्याय के लिए संघर्षरत एक महिला समूह है। इसका मुख्य उद्देश्य एक हिंसा मुक्त्त भेदभाव रहित समाज की स्थापना के लिए काम करना है जो न्याय तथा समानता के मूल्यों पर आधारित है। 5 सितंबर को खानकाह इंटर कालेज में गुफ्तगू मंच के अगुवाई में मेले का आयोजन किया जा रहा है। इसकी व्यवस्था मंच की लड़कियों द्वारा की गई है। नेतृत्व समूह अवधेश गुप्ता ने कहा कि संस्था महिलाओं के
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| मीडिया से बात करतीं डायरेक्टर पुष्पा शर्मा |
अधिकारों की प्राप्ति के लिए निशुल्क समाजिक और कानूनी सलाह देने का काम करती है। महिलाओं के निर्णय अनुसार हक की लड़ाई में सहयोग करती है। मंच द्वारा हर साल लगभग 50 केस संस्था में पंजीकृत कराए जाते हैं। कई केसों की पैरवी मंच की युवतियां खुद भी करती हैं। वरिष्ठ संर्दभदाता समूह शबीना मुमताज ने मीडिया को बताया कि गुफ्तगू मंच के माध्यम से किशोरियों व युवतियों को फोटोग्राफी, वीडियो ग्राफी, सोशल मीडिया, कार्टून बनाना, कॉमिक्स बनाना, कंप्यूटर, सिलाई, मेंहदी, टेडीबियर इत्यादि को प्रशिक्षण देकर उनके सशक्तीकरण के लिए काम किया जा रहा है। अपने आसपास हिंसा की पहचान के लिए युवतियों की समझ बनाई जाती है। ताकि वह शारीरिक, मानसिक, यौनिक व आर्थिक हिंसा को पहचान सकें। नेतृत्व समूह मंजू सोनी ने बताया कि मंच में शहर के अलावा हरदौली, छनेहरा, करबई, गोयरा, जमवारा, पुकारी, नसेनी, चंद्रनगर, लहुरेटा, पड़मई, शंकर बाजार, सकरिया और चित्रकूट के कर्वी, बसिला, भौरा, दरियाव पुरवा, अकुरिया गांवों की लड़कियां जुड़ी हुई हैं। प्रेसवर्ता में संस्था की फरहा खातून, कल्पना, रानी, फरजाना भी शामिल रहीं।


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