सांसदी की धौंस या कब्जे की कोशिश?
भाजपा नेता ने लगाए गंभीर आरोप, प्रशासन सकते में
चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि । प्रदेश में भले ही भाजपा की सरकार हो, लेकिन भाजपा नेता ही अगर सुरक्षित न हों, तो इसे क्या कहा जाए- प्रशासनिक विफलता या विपक्ष की दबंगई की जीत? जिले के सीतापुर चौकी क्षेत्र में सियासी हलचल उस समय तेज हो गई जब भाजपा नेता आनंद सिंह पटेल ने समाजवादी पार्टी के सांसद व उनके परिजनों पर गंभीर आरोप जड़ दिए। आरोप है कि सांसद के रसूख और दबदबे के बल पर भाजपा नेता की जमीन (गाटा संख्या 1030) की बाउंड्री अवैध रूप से गिरा दी गई, और कब्जे की नापाक कोशिश भी की गई।
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| विवादित स्थल और टूटी पडी बाउंड्री |
भाजपा नेता का कहना है कि इस जमीन का पूरा रिकॉर्ड उनके पास मौजूद है, लेकिन बावजूद इसके, सांसद पक्ष ने अपनी सांसदी की हनक दिखाते हुए सीधे बाउंड्री पर ही चढ़ाई कर दी। मामला तब और तूल पकड़ गया जब आनंद सिंह पटेल ने कहा कि उन्हें अब अपने प्राणों का भी खतरा महसूस हो रहा है। सवाल बड़ा है-जब प्रदेश में भाजपा की सरकार है, तब भाजपा नेता ही सुरक्षित नहीं हैं? क्या आम जनता की सुरक्षा की उम्मीद करना बेमानी नहीं? भाजपा नेता ने तुरंत इस पूरे मामले की सूचना जिला प्रशासन और पुलिस को दी, जिस पर कार्रवाई करते हुए उपजिलाधिकारी के निर्देश पर चौकी प्रभारी सीतापुर ने कार्य रुकवाया। लेकिन बड़ा सवाल अब भी लटक रहा है- क्या ये कार्यवाई पर्याप्त थी? क्या सांसद होना अब कानून से ऊपर हो जाना है? आनंद सिंह पटेल की गुहार साफ है-उन्हें न्याय चाहिए, सुरक्षा चाहिए और कार्रवाई चाहिए। लेकिन जिले में चर्चाओं का बाजार गर्म है कि अगर सत्ता पक्ष का कार्यकर्ता ही प्रशासनिक लाचारगी के सामने असहाय है, तो फिर आम जनता कहां जाए? बात केवल बाउंड्री गिराने की नहीं, यह संदेश देने की है कि सांसद का दर्जा अब कानून से बड़ा होता जा रहा है। यह लोकतंत्र के लिए चेतावनी है-क्योंकि जब सांसद अपनी शक्तियों का इस्तेमाल कब्जे के लिए करें, तो सवाल न सिर्फ सियासत पर उठता है, बल्कि कानून के इकबाल पर भी।
सांसद का जवाब
सपा सांसद कृष्णा देवी पटेल ने बताया कि 20 साल से जमीन पड़ी है और अब हमे जरूरत है, हम 15000 रुपए महीना किराया में ऑफिस चला रहे हैं तो हमने एसडीएम न्यायालय के आदेश से जमीन की नाप करवाई व पिलर कराने के लिए ट्रैक्टर के जाने का रास्ता नहीं था तो रास्ता हम कहीं न कहीं से तो लेंगे ही न? तो हमने पिलर करवाने के लिए अपने प्लॉट के सामने की बाउंड्री तोडकर पिलरिंग करवाने को ट्रैक्टर का रास्ता बनाया है। आगे बताया कि इस पूरे मामले में उनके तरफ से 30-35 लोग मौजूद थे।


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