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Monday, August 18, 2025

आबकारी विभाग की मिलीभगत से धर्मनगरी में 24 घंटे बिक रही शराब

शुक्रवार की देर रात छापेमारी के दौरान बरामद हुई आधा सैकडा शराब की पेटियां

कम माल दिखाकर विभाग ने उच्चाधिकारियों को किया गुमराह 

चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि । आबकारी विभाग की टीम ने एक घर से षराब की करीब आधा सैकडा अवैध रूप से बिक्री को रखी शराब की पेटियां बरामद किए जाने की चर्चाएं जोरों पर है। चर्चा यह भी है कि उक्त टीम भारी मात्रा में बरामद षराब अंदर कर आरोपी को लाखों रूपए की सौदेबाजी बाद दीवान के जरिए छोड दिया गया है। विभाग ने अपने बचाव को हल्का माल की बरामदगी दिखाकर किसी अन्य व्यक्ति को आरोपी बनाकर उच्चाधिकारियों को गुमराह किया है। मुख्यालय के पहाड़ी रोड गल्ला मंडी गेट की कंपोजिट सरकारी शराब दुकान के ठीक सामने किराना स्टोर और चक्की के सामने से 24 घंटे शराब बिक्री हो रही है। उसी दुकान संचालक के ही गोदाम से ही 52 पेंटी शराब बरामद की गई है। दावे के मुताबिक इस स्थान पर बीते कई सालों से 24 घंटे शराब की बिक्री अवैध


रूप से ओवर रेट में हो रही है। जिसके एवज में आबकारी हर माह 20 हजार रुपए की माहवारी वसूल रहा है। जिसके चलते इस अवैध कारोबारी को बचाने के लिए आबकारी विभाग ने उच्चाधिकारियों तक को गुमराह किया है। इसी तरह सीतापुर रामायण मेला के पास बड़े पैमाने पर अवैध तरीके से शराब प्रतिबंध के बावजूद भारी मात्रा में उपलब्ध रहती है। जिसके चलते उप्र क्षेत्र के धर्मनगरी के लगभग 42 स्थानों पर अवैध तरीके से 24 घंटे शराब बिक्री हो रही है। सूत्रों के मुताबिक पूरे जनपद में पैकारी के चलते लगभग दो सैकड़ा स्थानों पर 24 घंटे शराब की बिक्री हो रही है। इसमें आबकारी विभाग दो तरफ से अवैध वसूली कर रहा है। क्योंकि थोक शराब की बिक्री दुकानदार कर नहीं सकते तो वह भी 20 हजार रुपए की माहवारी दे रहे हैं। वहीं जो लोग 24 घंटे शराब बिक्री कर रहे हैं वह तो पूरी तरह से अवैध होने के चलते माहवारी देंगे ही। इस तरह आबकारी विभाग सरकारी राजस्व को बढ़ाने का दावा कर रहा है। जबकि अवैध तरीके से शराब की बिक्री कराने के एवज विभागीय अधिकारी हर माह लाखों रुपए आसानी से वसूल रहे हैं। बताया गया कि अवैध शराब बिक्री की सूचना देने पर शिकायतकर्ता को ही डांट डपट दिया जाता हैं। अवैध शराब पर दबिश का दबाव होने पर चिंहित स्थानों से कच्ची शराब बरामद करके फोटो सेशन करके खुद पीठ थपथपा कर इतिश्री कर ली जाती है। इस मामले में आबकारी विभाग के किसी अधिकारी ने कोई जवाब नहीं दिया। जबकि मोबाइल को ही बंद कर लिया गया।

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