चित्रकूट ब्यूरो, सुखेन्द्र अग्रहरि : जिला मुख्यालय के कुबेरगंज निवासी योगाचार्य रमेश सिंह राजपूत ने बताया कि कब्ज की समस्या से निजात पाने के लिए उदर शक्ति विकासक योग क्रिया का अभ्यास करना चाहिए। योगाचार्य ने बताया कि कब्ज सभी रोगों की जड़ है। कब्ज से मुक्ति मिलने से जीवन रोग रहित हो जाता है। बताया कि यदि आहार-विहार, अचार-विचार, रहन-सहन आदि को युक्ता-युक्त साधा जाए और पेट संबंधी सूक्ष्म योग क्रिया की श्रृंखला का खाली पेट निरंतर अभ्यास किया जाए तो कब्ज का उन्मूलन बहुत ही आसान है। समय पर सभी कार्य करने से योग व्यायाम दवाई बन जाएंगे और हम बीमार ही नहीं होंगे। बताया कि सुबह नाश्ते में शरीर के वजन का 10 प्रतिशत तीन या चार तरह के फल तथा शरीर के वजन का पांच प्रतिशत तीन या चार तरह का कच्चा सलाद खाना चाहिए। इसके बाद बाद घर में बना भोजन करना चाहिए। इसी प्रकार रात्रि का भोजन 8ः00 के पहले कर लेना चाहिए। बताया कि
खाली पेट सूक्ष्म योग क्रिया का अभ्यास करने पर पेट की सभी समस्याओं से निजात पाया जा सकता है। जिससे रक्त परिसंचरण, किडनी, लिवर, स्प्लीन, हृदय, मस्तिष्क की कार्य प्रणाली में आश्चर्यजनक सुधार होता है। योगाचार्य ने बताया कि उदर शक्ति विकासक योग क्रिया के भाग पांच को करने के लिए साम्यावस्था में एड़ी पंजा मिलाकर सीधे खड़े होते हैं। इसके बाद ठुड्ढी को कंठ कूप से लगा कर, आंखें खुली, ध्यान पेट पर रखते हुए 25 बार सांस लेते हुए पेट फुलाते और सांस छोड़ते हुए पेट पिचकाते है। इसे जल्दी-जल्दी करते हैं तथा बाद में शिथिल ताड़ासन में आकर विश्राम करते हुए पेट में हुए परिवर्तन का अनुभव करते हैं। सावधानी के तौर पर पेट की सर्जरी की दशा में अनुभवी योग शिक्षक की देखरेख में इसे करना चाहिए।


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