चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि । जिल में दुग्ध की धार के बीच व्यवस्था की परतें जब खुलीं, तो प्रशासन की सख्ती भी साथ नजर आई। गुरुवार को जिलाधिकारी पुलकित गर्ग ने पराग डेयरी पर औचक दस्तक देकर न सिर्फ मशीनों की धड़कन सुनी, बल्कि सिस्टम की सांसों की भी पड़ताल की। प्रोसेसिंग हॉल से लेकर गुणवत्ता जांच तक हर कोने में सवाल गूंजे- 2200 लीटर दूध की आवक के बीच क्या शुद्धता भी उतनी ही मजबूत है? निरीक्षण के दौरान 40 लीटर दूध का रिजेक्ट होना इस बात का संकेत बन गया कि मिलावट की परछाइयां अब भी मंडरा रही हैं। डीएम ने पारदर्शिता को हथियार बनाते हुए टेस्टिंग मानकों का सार्वजनिक प्रदर्शन अनिवार्य किया, ताकि दूध के हर कतरे का सच सामने आ सके। निरीक्षण में जर्जर बीएमसी और वाहनों की हालत ने भी सिस्टम की थकान उजागर की, जिस पर
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| डेयरी का निरीक्षण करते डीएम |
डीएम ने तत्काल नीलामी प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए। वहीं, पनीर-खोया उत्पादन और आधुनिक पैकेजिंग की योजना ने डेयरी को बाजार की नई दिशा देने का संकेत दिया। सबसे अहम बात- दूध उत्पादकों के भुगतान में देरी पर सख्त रुख अपनाते हुए साप्ताहिक भुगतान सुनिश्चित करने की बात कही गई। पिछले साल के 250 लीटर से बढ़कर अब 1100 लीटर औसत संकलन तक पहुंचना एक उपलब्धि जरूर है, लेकिन सवाल यही है- क्या यह बढ़ोतरी गुणवत्ता और पारदर्शिता के साथ टिक पाएगी?
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