सीडीओ की छापेमारी में खुला सच
चेतावनी के बाद भी लापरवाही
निरीक्षण में कई अधिकारी अनुपस्थित
चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि । जिले का विकास भवन गुरुवार सुबह उस समय सुर्खियों में आ गया, जब मुख्य विकास अधिकारी डीपी पाल ने अचानक निरीक्षण कर प्रशासनिक ढांचे की हकीकत को बेनकाब कर दिया। सुबह 10ः15 बजे शुरू हुए इस निरीक्षण में कई बड़े विभागों के जिम्मेदार अधिकारी अपनी कुर्सियों से नदारद मिले, मानो सरकारी दफ्तर नहीं बल्कि लापरवाही का अड्डा बन चुका हो। जिला युवा कल्याण, अल्पसंख्यक कल्याण, पिछड़ा वर्ग कल्याण, पंचायतराज और समाज कल्याण जैसे अहम विभागों के अधिकारी अनुपस्थित पाए गए, जबकि पहले भी इन्हें कई बार चेतावनी दी जा चुकी थी। हालात इतने बिगड़े हुए थे कि मनरेगा सेल में तैनात अतिरिक्त कार्यक्रम
![]() |
| विकास भवन का निरीक्षण करते सीडीओ |
अधिकारी ने पूरे मार्च महीने में उपस्थिति पंजिका तक पर हस्ताक्षर नहीं किए। निरीक्षण के दौरान कई कार्यालयों में कर्मचारियों की भारी अनुपस्थिति और अनुशासनहीनता खुलकर सामने आई, जिससे जनसुनवाई और योजनाओं के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े हो गए हैं। वहीं, कई विभागों में निष्प्रयोज्य सामग्रियों का अंबार लगा मिला, जो या तो लाभार्थियों तक नहीं पहुंची या वर्षों से धूल फांक रही है। इस पर सीडीओ ने सख्त रुख अपनाते हुए एक सप्ताह के भीतर नीलामी और वितरण के निर्देश दिए हैं, अन्यथा वेतन रोकने की चेतावनी दी है। सीडीओ ने अनुपस्थित अधिकारियों और कर्मचारियों का वेतन तत्काल प्रभाव से रोकते हुए दो दिन में स्पष्टीकरण मांगा है। इस कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि अब लापरवाही की कीमत सीधे जेब से चुकानी होगी। सवाल है कि क्या इस सख्ती के बाद भी व्यवस्था सुधरेगी या फिर फाइलों में ही सुधार की कहानी लिखी जाती रहेगी?
.jpeg)

No comments:
Post a Comment