10 पारंपरिक ट्रेडों से जुड़े प्रवासियों और स्थानीय कारीगरों को मिला सरकारी ऋण का सहारा
अनुसूचित जाति के 822 लाभार्थियों को सीधे लाभ, सामाजिक न्याय की दिशा में बड़ा कदम
बांदा, के एस दुबे । उत्तर प्रदेश की योगी सरकार की विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना बांदा जिले के हजारों कामगारों के लिए वरदान साबित हो रही है। जिले के लगभग 4700 प्रवासियों और स्थानीय कारीगरों ने इस योजना के माध्यम से अपने हुनर को स्वरोजगार में बदलकर आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिखी है। वहीं योगी सरकार की इस पहल से अब जिले में लघु उद्योगों का जाल बिछेगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। वहीं स्थानीय स्तर पर लघु उद्योगों की स्थापना से जिले की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और पलायन पर भी रोक लगेगी।
सरकार की इस योजना से पारंपरिक हुनर को मिली नई उड़ान
बांदा में इस योजना के तहत बढ़ई, लोहार, कुम्हार, दर्जी, टोकरी बुनकर, नाई, सुनार, मोची, हलवाई और राजमिस्त्री जैसे 10 पारंपरिक ट्रेडों पर विशेष ध्यान दिया गया है। इन कारीगरों को न केवल आधुनिक टूलकिट और प्रशिक्षण दिया गया बल्कि अपना उद्यम शुरू करने के लिए सरलता से विभाग द्वारा लोन भी उपलब्ध कराया गया है। जिससे अब ये कामगार दूसरों के यहां नौकरी करने के बजाय खुद का उद्योग स्थापित कर मालिक की भूमिका में नजर आएंगे।
अनुसूचित जाति के 822 लाभार्थियों को मिला लाभ
इस योजना के क्रियान्वयन में सामाजिक समरसता और न्याय का भी पूरा ध्यान रखा गया है। बांदा जिले में अनुसूचित जाति के 822 लाभार्थियों को योजना से सीधे जोड़कर उन्हें मुख्यधारा में लाने का प्रयास किया गया है। जिससे ग्रामीण और पिछड़े इलाकों के इन हुनरमंद कामगारों को अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने का सीधा मौका मिला है।बड़ी बात यह है कि कोरोना काल या अन्य कारणों के चलते अपने घर लौटे प्रवासियों के लिए यह योजना संजीवनी बनकर आई है। जिसस बाहर जाकर मजदूरी करने वाले हाथ अब अपने ही जिले में स्वरोजगार के माध्यम से परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं।


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