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Sunday, April 19, 2026

प्रजनन स्वास्थ्य संवर्धन के लिए करें पवनमुक्तासन

चित्रकूट,  सुखेन्द्र अग्रहरि  । जनपद के मुख्यालय स्थित कुबेरगंज में योगाचार्य रमेश सिंह राजपूत ने रविवार को योगाभ्यास कराते हुए बताया कि रीढ़, पेट, पीठ और रिप्रोडक्टिव सिस्टम की शिथिलता के कारण शारीरिक मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ जाता है। श्रोणि (पेल्विक) की मांसपेशियों और प्रजनन अंगों के स्वास्थ्य में बेहतर प्रभाव डालने वाला, पीठ के निचले हिस्से की मांसपेशियों को मजबूत बनाने वाला, रीढ़ में सुधार करने वाला, पेट की गैस, पाचन क्रिया और कब्ज में सकारात्मक सुधार करने वाला पवनमुक्तासन भाग 2 का अभ्यास बहुत ही प्रभावशाली है। अपनी दैनिक दिनचर्या में इसे शामिल करके मन मस्तिष्क और शारीरिक खुशहाली प्राप्त की जा सकती है। इसे करने के लिए पीठ के बल सीधे लेट कर श्वास छोड़ते हुए दोनों पैरों को घुटनों से मोड़ते हुए दोनों जांघों को एक साथ मिलाकर सीने की


तरफ लाते हैं, दोनों हाथों की उंगलियों को आपस में फंसा कर घुटनों के थोड़ा नीचे रखकर गहरा सांस लेकर छोड़ते हुए दबाव देकर सिर और कंधों को ऊपर की ओर उठाते हैं और घुटनों के बीच के स्थान में नाक स्पर्श कराने का प्रयास करते हैं, फिर 10 सेकंड तक इस स्थिति में रुकते हैं, सांस लेकर छोड़ते हुए धीरे-धीरे सिर कंधों और पैरों को वापस शवासन की स्थिति में लाते हैं। इसे तीन से पांच बार दोहराते हैं। सावधानी के तौर पर हाई ब्लड प्रेशर, गंभीर कमर दर्द, साइटिका और सर्वाइकल की स्थिति में इसे योग विशेषज्ञ की देखरेख में करना चाहिए।


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