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Tuesday, April 21, 2026

शारीरिक एवं मानसिक रुप से संतुलित रहने के लिए संतो से लेनी चाहिए प्रेरणा - कुलपति

चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि : जगदगुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय के अष्टावक्र सभागार में वर्तमान परिप्रेक्ष्य में मानसिक स्वास्थ्य की प्रासंगिकता विषय पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का भव्य उद्घाटन संपन्न हुआ। संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. शिशिर कुमार पांडेय ने सर्वप्रथम मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर संगोष्ठी का शुभारंभ किया। संगोष्ठी की संयोजक डॉ. अमिता त्रिपाठी ने सर्वप्रथम संगोष्ठी के औचित्य तथा महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्तमान समय में जबकि एकाकीपन और तनाव के दौर में लोग गंभीर मानसिक स्वास्थ्य से जूझ रहे हैं। ऐसे समय में हमें चर्चा कर सार्थक समाधान की आवश्यकता है जिससे व्यक्ति शारीरिक एवं मानसिक रूप से संतुलित महसूस कर सकें। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. शिशिर कुमार पांडेय ने कहा की अच्छे मन से स्वास्थ्य के लिए हमें अपने प्राचीन संतों से भी प्रेरणा लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि संत तुलसीदास ने भी काम, क्रोध, मोह पर नियंत्रण करके मानसिक स्वास्थ्य को नियंत्रित करने की सुंदर व्याख्या प्रस्तुत की है। उन्होंने कहा कि हम अपने अंदर की सच्चाई को स्वीकार करके स्वयं को मानसिक रूप से स्वस्थ रख सकते हैं।



इस अवसर पर उपस्थित मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. भूपेश द्विवेदी ने कहा कि हम औरों के लिए क्या अच्छा कर सकते हैं यह सोचकर तथा अपने व्यवहार में अपनाकर अपना मानसिक स्वास्थ्य अच्छा रख सकते हैं। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक चित्रकूट डाॅ. शैलेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि मोबाइल के अत्यधिक प्रयोग से लोग गंभीर मानसिक बीमारियों से जूझ रहे हैं, इसके लिए उन्हें सतत निर्देशन व परामर्श की आवश्यकता है जो मनोवैज्ञानिक शिक्षा के माध्यम से ही प्रदान किया सकता है। विशिष्ट अतिथि प्रो. तारेश भाटिया ने कहा कि अच्छे मानसिक स्वास्थ्य के लिए हमें अपने वास्तविकता के धरातल पर ही जीवन जीना चाहिए तथा जीवन में स्वायत्तता को बनाए रखकर हमें अपने कार्य स्वयं करने की आदत होनी चाहिए। हम अपनी महत्वाकांक्षा को नियंत्रित रखकर ही अच्छा मानसिक स्वास्थ्य बना सकते हैं। प्रो. लीना कोहली ने कहा कि मानव मस्तिष्क के अनेक आयामों पर वर्तमान कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग में मानसिक स्वास्थ्य चुनौती बनता जा रहा है जिससे समय रहते तकनीकी तथा अन्य सुविधाओं के नियंत्रण से हम मनोवैज्ञानिक परामर्श के द्वारा मानसिक स्वास्थ्य अच्छा बना सकते हैं।


स्नातकोत्तर चिकित्सा संस्थान चंडीगढ़ से आए प्रा.े ललित कुमार सिंह ने स्वप्न की विभिन्न दशाओं में मनोवैज्ञानिक प्रभाव तथा मानसिक स्वास्थ्य तथा उसके संबंध पर विस्तार से चर्चा की। नेपाल से डिजिटल माध्यम से संबोधित करते हुए त्रिभुवन यूनिवर्सिटी के प्रो. नरेंद्र सिंह ठागुणा ने साउथ एशिया में आत्महत्या के मामले को रोकने के लिए मानसिक स्वास्थ्य के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डाला। त्रिभुवन विश्वविद्यालय, काठमांडू नेपाल की डॉ. उषा किरण सुब्बा ने वर्तमान समय में मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित विभिन्न मुद्दों एवं समस्याओं की चर्चा की और कहा कि इसका समाधान हमें मिलकर निकालना होगा। इस अवसर पर सिक्किम अल्पाइन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सुरेंद्र कुमार तिवारी भी उपस्थित रहे। उन्होंने जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय के साथ समझौता भी संपन्न किया। कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन मनोविज्ञान विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर संजय कुमार नायक ने किया। कार्यक्रम का संचालन प्रबंधन विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. भविष्या माथुर ने किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव मधुरेंद्र कुमार पर्वत, अधिष्ठाता डाॅ. महेंद्र कुमार उपाध्याय, डॉ. विनोद कुमार मिश्रा, डॉ. निहार रंजन मिश्र, डॉ. रजनीश कुमार सिंह, डॉ. रवि प्रकाश शुक्ला, डॉ. गोपाल कुमार मिश्र, डॉ. रमा सोनी, डॉ. रीना पांडेय, डॉ. दलीप कुमार, डॉ. गोपाल कुमार मिश्र, डॉ. हरिकांत मिश्र, डॉ. नीतू तिवारी, डॉ. दुर्गेश कुमार मिश्र सहित विश्वविद्यालय परिवार के समस्त सदस्य मौजूद रहे।


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