दुगना बजट मांगने पर सियासत गरम
बजट का बुलबुला या विकास का सपना
चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि । चित्रकूटधाम नगर पालिका परिषद के पूर्व प्रत्याशी सावित्री श्रीवास्तव ने नगर पालिका के चर्चित बजट को लेकर ऐसा बयान दिया है, जिसने विकास के दावों पर सियासी धूल उड़ा दी है। उन्होंने साफ कहा कि करोड़ों का बजट कोई सरकार की सौगात नहीं, बल्कि विभागीय कर्मचारियों के साथ बैठकर तैयार किया गया अनुमानित मांग पत्र होता है, जिसे परंपरा के अनुसार अक्सर बढ़ा-चढ़ाकर सरकार को भेजा जाता है। इसमें कर्मचारियों का वेतन, टीए-डीए, रिटायरमेंट फंड, स्टेशनरी, वाहन, बिजली सामग्री, साफ-सफाई, चूना, पार्क, जल स्वच्छता, मठ-मंदिर सजावट, मेले और बैठकों तक के खर्च को अनुमानित रूप से दुगना दिखाया जाता है ताकि भविष्य की जरूरतों के हिसाब से अधिक धनराशि मांगी जा सके। पूर्व सभासद ने आरोप लगाया कि अब इसी
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| सावित्री श्रीवास्तव पूर्व प्रत्याशी नगर पालिका कर्वी |
प्रक्रिया को ऐतिहासिक बजट बताकर राजनीतिक उपलब्धि की तरह पेश किया जा रहा है, जबकि वास्तविकता यह है कि सरकार केवल मांग सुनती है, अंतिम आवंटन बाद में तय होता है। उन्होंने कहा कि यदि पालिका अपनी आमदनी कम और खर्च ज्यादा दिखाएगी तो सरकार टैक्स बढ़ाने का दबाव बनाएगी, जिसका बोझ अंततः जनता पर पड़ेगा। उन्होंने हालिया कर वृद्धि का उदाहरण देते हुए कहा कि जनता को पहले ही करोड़ों के विकास का सपना दिखाया जा रहा है, जबकि अभी तक वास्तविक धनराशि मिली ही नहीं है। साथ ही उन्होंने यह भी तंज कसा कि बजट आने के बाद बड़े कार्य उन्हीं ठेकेदारों को मिलते हैं जिन्होंने पहले से सहयोग किया होता है। उन्होंने नगर पालिका से मांग की कि जनता के सामने स्पष्ट किया जाए कि किस मद में कितनी धनराशि मांगी गई है और वास्तव में कितना आवंटन मिला है, ताकि विकास और चुनावी प्रचार के बीच का अंतर साफ हो सके।
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