तीन बेजुबानों की मौत; बिजली विभाग के तंत्र पर उठे गंभीर सवाल
अतर्रा/बांदा, के एस दुबे । जनपद के अतर्रा थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पचोखर में विद्युत विभाग की घोर लापरवाही ने एक बार फिर सरकारी निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था की कलई खोलकर रख दी है। यहाँ मुख्य विद्युत लाइन का एक हाईटेंशन तार टूटकर खेत में गिर गया, जिसमें पूरे 24 घंटे तक मौत बनकर करंट दौड़ता रहा। विभाग की उदासीनता का आलम यह रहा कि इतनी लंबी अवधि बीत जाने के बाद भी कोई जिम्मेदार अधिकारी या लाइनमैन मौके पर नहीं पहुँचा। इस लापरवाही की कीमत तीन बेजुबान जानवरों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। करंट की चपेट में आने से दो गौवंश और एक जंगली बनरोझ की तड़प-तड़पकर मौके पर ही मौत हो गई।
इस दर्दनाक हादसे के बाद से पचोखर गाँव के किसानों और ग्रामीणों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। ग्रामीणों का सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस खेत में किसान लगातार खरीफ की बुवाई और खेती का काम कर रहे थे, वहाँ यदि कोई किसान या मजदूर इस करंट की चपेट में आ जाता तो उसकी मौत की जिम्मेदारी कौन लेता? ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि लाइन टूटने की सूचना तत्काल दिए जाने के बावजूद न तो पावर हाउस से बिजली काटी गई और न ही किसी ने मौके पर आने की जहमत उठाई। इससे साफ है कि ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति पूरी तरह भगवान भरोसे चल रही है। घटना की भनक लगते ही जब विभागीय लाइनमैन लाइन जोड़ने के लिए गाँव पहुँचे, तो आक्रोशित किसानों ने उन्हें साफ शब्दों में काम करने से रोक दिया। ग्रामीणों ने दोटूक कहा कि जब तक विभाग के उच्चाधिकारी मौके पर आकर इस घोर लापरवाही की जवाबदेही तय नहीं करते और दोषी कर्मचारियों पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई नहीं होती, तब तक बिजली आपूर्ति बहाल नहीं होने दी जाएगी। मृत गाय के मालिक (किसान) ने रोते हुए आरोप लगाया कि यदि समय रहते लाइन बंद कर दी जाती, तो उनकी गाय समेत तीनों बेजुबानों की जान बचाई जा सकती थी। उधर, गौरक्षा समिति के जिलाध्यक्ष महेश प्रजापति ने भी घटना स्थल का निरीक्षण कर पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट तैयार की है और दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग उठाई है।
इस पूरे मामले ने उस समय और गंभीर मोड़ ले लिया जब पावर हाउस के ही एक कर्मचारी ने दबी जुबान में स्वीकार किया कि कई बार मुख्य लाइन टूटने के बाद भी तकनीकी खामियों के कारण कट-आउट संचालित नहीं होता, जिससे फॉल्ट की सूचना पावर हाउस के पैनल तक पहुँच ही नहीं पाती। यदि कर्मचारी का यह दावा सही है, तो यह सवाल केवल पचोखर गाँव का नहीं बल्कि पूरे बाँदा जिले की विद्युत सुरक्षा व्यवस्था पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है। आखिर करोड़ों रुपये के बजट और रखरखाव के दावों के बावजूद विभाग के पास ऐसा कौन सा तकनीकी ढांचा है जो अपनी ही मुख्य लाइन टूटने का सिग्नल 24 घंटे तक नहीं पकड़ पाता? क्या फील्ड कर्मचारियों की पेट्रोलिंग और गश्त केवल सरकारी कागजों तक ही सीमित है? बढ़ते जनाक्रोश और हंगामे को देखते हुए किसानों ने मामले की लिखित शिकायत नरैनी की भाजपा विधायक ओममणि वर्मा, चित्रकूटधाम मंडल के आयुक्त अजीत कुमार और बिजली विभाग के अधीक्षण अभियंता तक पहुँचाई। वीआईपी हस्तक्षेप और उच्चाधिकारियों के कड़े रुख के बाद स्थानीय पुलिस और विभागीय अमला आनन-फानन में गाँव पहुँचा। प्रशासन की मौजूदगी में मृत गौवंश के ससम्मान अंतिम संस्कार की व्यवस्था शुरू कराई गई। हालांकि, अधिशासी अभियंता द्वारा कार्रवाई के आश्वासन के बाद भी ग्रामीणों का गुस्सा शांत नहीं हुआ है। पचोखर की यह घटना केवल एक हादसा नहीं, बल्कि बिजली विभाग के जर्जर तंत्र और प्रशासनिक संवेदनहीनता का जीता-जागता सबूत है। अब देखना यह होगा कि क्या तीन बेजुबानों की मौत के बाद वाकई दोषियों पर गाज गिरेगी या फिर हर बार की तरह यह मामला भी विभागीय जांच और आश्वासनों की फाइलों में दफन हो जाएगा।


No comments:
Post a Comment