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Sunday, July 12, 2026

किसानों की आवाज गूंजेगी अब राजधानी में, आमरण अनशन स्थगित

27 दिनों से जारी था किसानों का अनशन, पूर्व मंत्रियों ने जूस पिलाकर तुड़वाया

बांदा, के एस दुबे । धरती पुत्र जब भूखा होगा, सुख का सागर सूखा होगाष् और ष्धरती प्यासी, खेत उदास, सत्याग्रह ही अन्तिम आशष् जैसे नारों के साथ कलेक्ट्रेट स्थित अशोक लाट चौराहे पर पिछले 27 दिनों (16 जून से) से जारी किसानों का आमरण अनशन रविवार को स्थगित हो गया। चकबंदी विभाग की कार्यशैली और कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के बैनर तले कड़ा रुख अपनाए किसानों के मंच पर उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व राज्यमंत्री व राज्यसभा सांसद विशम्भर प्रसाद निषाद तथा पूर्व मंत्री शिवशंकर पटेल पहुँचे। दोनों वरिष्ठ नेताओं ने अनशनकारी किसानों की लगातार बिगड़ती सेहत को ध्यान में रखते हुए संकट मोचन मंदिर बांदा में उन्हें जूस पिलाकर आमरण अनशन को स्थगित कराया। हालांकि, संगठन ने साफ किया है कि धरना पूरी तरह


समाप्त नहीं हुआ है बल्कि यह श्आमरण अनशनश् अब श्क्रमिक अनशनश् में बदल गया है, और न्याय की इस लड़ाई को अब सीधे 14 जुलाई 2026 से चकबंदी निदेशालय, लखनऊ में अनशन के रूप में शुरू किया जाएगा। भाकियू (अरा०) के सदर तहसील अध्यक्ष रोहित द्विवेदी ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि बिना धरातल पर काम पूरा किए जिले को कागजों में प्रदेश स्तर पर नंबर-1 दिखाने के लिए शासन को गलत सूचनाएं भेजी जा रही हैं। इसी फर्जीवाड़े के विरोध में ग्राम लोहरा, अमलीकौर, सिलेहटा, बहिंगा, खप्टिहा खुर्द एवं महबरा के किसान अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठने को मजबूर हुए। अब तक 04 आमरण अनशनकारियों की तबीयत अत्यधिक बिगड़ चुकी है, जिन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराकर इलाज दिलाना पड़ा। पूर्व मंत्रियों ने किसानों को ढांढस बंधाते हुए कहा कि ष्संविधान अभी मरा नहीं है, लखनऊ में न्याय की लड़ाई मजबूती से लड़ी जावेगी।

इस ऐतिहासिक किसान सत्याग्रह के दौरान राष्ट्रीय सचिव हरदत्त पाण्डेय, बुंदेलखंड किसान केसरी बलराम तिवारी, महेंद्र त्रिपाठी, रोहित द्विवेदी (सदर तहसील अध्यक्ष), अशोक तिवारी, जगप्रसाद फौजी, रावेंद्र सिंह, किसान नेता पीयूष तिवारी, रमेश मिश्रा, बच्चीलाल, जागेश्वर गुप्ता, रामशरण, रामपाल, रामराधना सिंह, वीरेंद्र सिंह, भोला सिंह, रोहिणी गुप्ता और सीता मिश्रा सहित भारी संख्या में पीड़ित किसान और महिलाएं उपस्थित रहीं। किसानों ने संकल्प लिया है कि जब तक छीनी गई जमीनें वापस नहीं मिल जातीं, यह आंदोलन अनवरत जारी रहेगा।


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