चित्रकूट मंडल में 280 महिला परिचालकों के हाथों में सुरक्षित सफर की कमान
बांदा डिपो में सबसे ज्यादा 103 बेटियां संभाल रही हैं मोर्चा, दिल्ली-लखनऊ तक भर रहीं उड़ान
बांदा, के एस दुबे । उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने महिला सशक्तिकरण और लैंगिक समानता की दिशा में एक और ऐतिहासिक मील का पत्थर स्थापित किया है। कभी पूरी तरह पुरुष प्रधान माना जाने वाला परिवहन विभाग अब सूबे की बेटियों की आत्मनिर्भरता का नया गवाह बन रहा है। योगी सरकार की दूरदर्शी नीतियों के चलते चित्रकूट मंडल के सभी डिपो में 280 महिला परिचालक (कंडक्टर) रोजाना हजारों यात्रियों को पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ उनके गंतव्य तक पहुंचा रही हैं।
बांदा डिपो में सबसे अधिक 103 बेटियां तैनात
इस मुहिम में बांदा जिला सबसे आगे नजर आ रहा है। मंडल के विभिन्न डिपो में महिला शक्ति की तैनाती के आंकड़े सरकार के प्रयासों की सफलता को साफ बयां करते हैं। चित्रकूट मंडल के बांदा डिपो में जहां 103 महिला परिचालक पुरुष प्रधान माने जाने वाले इस चुनौती पूर्ण कार्य को सहजता से कर रही हैं तो वही हमीरपुर डिपो में 24, राठ डिपों में 69, चित्रकूट डिपो में 18 व महोबा डिपो में 66 महिला परिचालक हैं।
दिल्ली से लखनऊ तक और ग्रामीण रूटों पर बसों का करती हैं संचालन
ये जांबाज महिला परिचालक केवल स्थानीय स्तर पर ही नहीं बल्कि देश की राजधानी दिल्ली से लेकर प्रदेश की राजधानी लखनऊ तक के लंबे और चुनौतीपूर्ण रूटों पर बसों का सफल संचालन कर रही हैं। इसके साथ ही दिन के समय अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों के रूटों की कमान भी इन्हीं के हाथों में सौंपी गई है। यात्रियों के साथ सौम्य और कुशल व्यवहार के कारण इन महिला परिचालकों की हर तरफ सराहना हो रही है।
रोजगार मेलों से मिला बेटियों को पंख
विभागीय अधिकारियों के अनुसार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर समय-समय पर आयोजित होने वाले रोजगार मेलों के माध्यम से इन पदों पर पारदर्शी भर्ती की गई है। इस पहल ने न सिर्फ ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों की महिलाओं को रोजगारपरक बनाकर आर्थिक रूप से स्वतंत्र किया है। बल्कि उनके भीतर एक नया आत्मविश्वास भी जगाया है। विपरीत परिस्थितियों और चुनौतीपूर्ण माहौल में भी इन बेटियों का यह जज्बा नए उत्तर प्रदेश की बदलती और सशक्त तस्वीर को पेश कर रहा है।


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