फावड़ा लेकर नाली साफ करने उतरे समाजसेवी
तिंदवारी /बांदा, के एस दुबे । नगर पंचायत तिंदवारी में सफाई व्यवस्था पूरी तरह वेंटिलेटर पर आ चुकी है। कस्बे में जगह-जगह लगे कूड़े के ढेर, जाम नालियां और बजबजाती गंदगी के कारण स्थानीय निवासियों का जीना दूभर हो गया है। जिम्मेदार विभाग और नगर पंचायत प्रशासन की घोर लापरवाही से तंग आकर अब समाजसेवियों ने खुद मोर्चा संभाल लिया है। शनिवार को दलित चेतना संघ के जिला अध्यक्ष राजेंद्र द्विवेदी तिंदवारी के शंकर नगर मोहल्ले में खुद बेलचा और फावड़ा लेकर नालियों की सफाई करते नजर आए। उन्होंने नाली में फंसे कूड़े और कीचड़ को खुद बाहर निकाला। इस दौरान मोहल्ले में सफाई करते हुए उनके फोटो और वीडियो भी सोशल
मीडिया पर जमकर वायरल हो रहे हैं, जो नगर पंचायत के दावों की पोल खोल रहे हैं। दलित चेतना संघ के जिला अध्यक्ष राजेंद्र द्विवेदी ने बताया कि शंकर नगर की बदहाली को लेकर पिछले कई महीनों से नगर पंचायत के जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को मौखिक व लिखित रूप से अवगत कराया गया, लेकिन कुंभकर्णी नींद में सोए प्रशासन ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। राजेंद्र द्विवेदी ने कहा कि वर्षा ऋतु में हल्की सी बारिश होते ही नालियों का गंदा पानी लोगों के घरों के भीतर घुस जाता है। नालियां कचरे से पूरी तरह चोक हैं। उधर, सब्जी मंडी में कूड़े का पहाड़ खड़ा हो गया है, जिससे संक्रामक बीमारियों और मच्छरों का खतरा बढ़ गया है। जब अधिकारियों ने हमारी नहीं सुनी, तो मजबूरी में हमें खुद फावड़ा उठाना पड़ा।
स्थानीय निवासियों का गंभीर आरोप है कि नगर पंचायत का सफाई अमला केवल कागजों पर दौड़ रहा है। सफाई कर्मी महीने में बमुश्किल एक या दो बार ही शक्ल दिखाते हैं। यही बदतर स्थिति केवल शंकर नगर की नहीं, बल्कि पूरे तिंदवारी कस्बे की बनी हुई है। कस्बे के लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि तिंदवारी में नियमित सफाई व्यवस्था बहाल कराई जाए और लापरवाह कर्मचारियों पर कार्रवाई हो। चेतावनी दी गई है कि यदि जल्द ही स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो नगरवासी सड़क पर उतरकर उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। फिलहाल, समाजसेवी की इस पहल के बाद पूरे कस्बे में चर्चा है कि यदि जिम्मेदार अपनी जिम्मेदारी नहीं समझेंगे, तो आम जनता को इसी तरह आगे आना पड़ेगा।


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