कानपुर नगर, प्रदीप शर्मा । कानपुर के ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक महत्व के राजा ययाति टीला (जाजमऊ), नागेश्वर सिद्धपुरी धाम मंदिर तथा बुढ़ियाघाट को अतिक्रमण एवं प्रदूषण से मुक्त कराने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। उत्तर प्रदेश राज्य पुरातत्व विभाग के निदेशक द्वारा जिलाधिकारी, कानपुर नगर को पत्र जारी कर इन स्थलों के संरक्षण एवं अतिक्रमण हटाने के लिए आवश्यक एवं प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। यह कार्रवाई सनातन मठ मंदिर रक्षा समिति के प्रदेश अध्यक्ष श्री अजय कुमार द्विवेदी द्वारा 18 मई 2026 को भेजे गए विस्तृत प्रार्थना-पत्र एवं पूर्व में किए गए पत्राचार के आधार पर की गई है। विभाग ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि जाजमऊ का टीला उत्तर प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 1968 से संरक्षित पुरातात्विक स्थल घोषित है, जहां पूर्व में हुए उत्खनन में लगभग 2800 वर्ष प्राचीन सभ्यता के अवशेष प्राप्त हुए हैं। पुरातत्व विभाग ने जिलाधिकारी से अनुरोध
किया है कि जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन एवं राजस्व विभाग की संयुक्त टीम गठित कर संरक्षित स्थल को अतिक्रमण से मुक्त कराया जाए तथा नागेश्वर सिद्धपुरी धाम मंदिर एवं बुढ़ियाघाट क्षेत्र को प्रदूषणमुक्त एवं संरक्षित बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएँ। श्री अजय कुमार द्विवेदी ने कहा कि यह केवल एक धार्मिक स्थल का विषय नहीं, बल्कि भारत की प्राचीन सांस्कृतिक एवं पुरातात्विक धरोहर के संरक्षण का प्रश्न है। उन्होंने जिला प्रशासन से अपेक्षा व्यक्त की कि पुरातत्व विभाग के निर्देशों का शीघ्र अनुपालन कर इस अमूल्य विरासत को सुरक्षित रखा जाएगा। संस्था के उपाध्यक्ष सुधीर द्विवेदी ने जिला प्रशासन एवं संबंधित पुरातत्व विभाग से मांग करते हैं कि राजा ययाति किले की सीमाओं का विधिवत सर्वेक्षण कराकर सभी अवैध अतिक्रमणों को हटाया जाए तथा इस अमूल्य ऐतिहासिक धरोहर का संरक्षण एवं सौंदर्यीकरण कराया जाए। राजा ययाति का किला केवल एक ऐतिहासिक स्मारक नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक एवं पुरातात्विक विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक है। इसका संरक्षण वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों के लिए अत्यंत आवश्यक है। इस ऐतिहासिक धरोहर को अतिक्रमण मुक्त कराकर तथा इसे पर्यटन एवं सांस्कृतिक महत्व के केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में ठोस कदम उठाए।


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