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Saturday, July 4, 2026

मंचों पर दावे, धरातल पर ध्वस्त स्वास्थ्य व्यवस्था आखिर ग्रामीणों का दोष क्या है

लखनपुर के उप स्वास्थ्य केंद्र में चारों तरफ भूसा, लकड़ी, कंडे और गंदगी फैली 

बबेरू/बांदा, के एस दुबे । शालिनी सिंह पटेल, प्रदेश उपाध्यक्ष जनता दल (यूनाइटेड) एवं बुंदेलखंड प्रभारी, बबेरू विधानसभा 233 के विकासखंड कमासिन की ग्राम पंचायत लखनपुर, बीरा और मुसीवा के स्थलीय निरीक्षण पर पहुँची। तीनों गांवों में स्वास्थ्य व्यवस्था की जमीनी हकीकत बेहद चिंताजनक और शर्मनाक निरीक्षण में मिली। लखनपुर के उप स्वास्थ्य केंद्र में चारों तरफ भूसा, लकड़ी, कंडे और गंदगी फैली हुई है, जिससे साफ़ प्रतीत होता है कि अस्पताल का उपयोग स्वास्थ्य सेवाओं के बजाय गोदाम की तरह किया जा रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि यहां एएनएम की ड्यूटी तो लगी है, लेकिन वह नियमित रूप से कभी आती ही नहीं। इस संबंध में जब शालनी ने मुख्य


चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) से बात की तो उन्होंने जांच कराने का आश्वासन दिया। लेकिन सवाल यह है कि जब ड्यूटी लगी है तो स्वास्थ्य केंद्र बंद क्यों है और जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब होगी? बीरा में बड़ा अस्पताल है, जहां पहले प्रसव भी होते थे, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि डॉक्टर कभी नहीं आते। कभी-कभार कोई कर्मचारी आकर केवल पैरासिटामोल, विटामिन और कैल्शियम की गोलियां बांटकर चला जाता है। वहीं मुसीवा के ग्रामीणों ने बताया कि वहां का अस्पताल आज तक नियमित रूप से खुला ही नहीं। यह भी बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि अस्पताल के सामने लगने वाली स्ट्रीट लाइट भी नहीं लगाई गई। ग्रामीणों के अनुसार ग्राम प्रधान ने अधिकतर स्ट्रीट लाइटें अपने लोगों के घरों के सामने लगवा दीं, जबकि अस्पताल परिसर आज भी अंधेरे में पड़ा है। मंचों से स्वास्थ्य व्यवस्था के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, कागजों में योजनाएं दौड़ती हैं, लेकिन धरातल पर स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त दिखाई देती है। क्या ग्रामीण क्षेत्र की जनता बेहतर इलाज की हकदार नहीं है? मैं गांव-गांव जाकर जनता की समस्याएं सुन रही हूं और उनकी आवाज़ को जनता के सामने रखती रहूंगी। किसी नेता या अधिकारी को यह सच्चाई दिखाई दे या न दे, लेकिन मैं लिखना और बोलना बंद नहीं करूंगी, क्योंकि जनता की आवाज़ उठाना ही मेरी जिम्मेदारी है।


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