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Thursday, July 30, 2026

बांदा में कृषि और पशु सखियां बदली रहीं जिले की सूरत

योगी सरकार की नीतियों से आत्मनिर्भर बन रहीं ग्रामीण महिलाएं

योगी सरकार की प्रेरणा से लगभग 400 सखियाँ बनीं 'रोल मॉडल'

बांदा, के एस दुबे । मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का असर अब बुंदेलखंड की जमीन पर साफ दिखने लगा है। बांदा जिले में उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत योगी सरकार द्वारा महिलाओं को स्वावलंबी बनाने का अभियान अब एक बड़ी क्रांति का रूप ले चुका है। जिले की लगभग कृषि सखियां जिन्हें 'फार्म आजीविका सखियां' कहा जाता है। इन्होंने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करते हुए न केवल किसानों की आय बढ़ा रही हैं। बल्कि प्राकृतिक और रसायन मुक्त खेती की अलख जगाकर मुख्यमंत्री के 'सुरक्षित और समृद्ध उत्तर प्रदेश' के संकल्प को साकार कर रही हैं।



योगी सरकार की प्रेरणा से 'रोल मॉडल' बनीं ग्रामीण महिलाएं

डबल इंजन सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल महिला सशक्तिकरण का सबसे बेहतरीन उदाहरण बांदा के गांवों में देखने को मिल रहा है। बड़ोखर खुर्द गांव की सरिता द्विवेदी, रीगा की सरिता शर्मा, सिमरिया की रीतु, कोर्रम की राधा और नरैनी की श्रीदेवी जैसी सैकड़ों महिलाएं आज योगी सरकार की नीतियों के चलते समाज के लिए रोल मॉडल बन चुकी हैं। सरकार ने कृषि सखी और पशु सखी के कार्यों को एकीकृत करते हुए इन्हें 'फार्म आजीविका सखी' का नया नाम और सम्मान दिया है।


किचन गार्डन से 'प्रेरणा पोषण वाटिका' तक का सफर

योगी सरकार का उद्देश्य प्रदेश के हर नागरिक को कुपोषण से बचाना और जहर मुक्त भोजन उपलब्ध कराना है। इसी विजन को आगे बढ़ाते हुए ये प्रशिक्षित सखियां गांवों में घर-घर जाकर 'प्रेरणा पोषण वाटिका' और किचन गार्डन तैयार करवा रही हैं। इससे ग्रामीण परिवारों को घर पर ही ताजा और रसायन मुक्त सब्जियां मिल रही हैं जिससे स्वास्थ्य और पोषण के स्तर में भारी सुधार हो रहा है।


जीरो बजट नेचुरल फार्मिंग को बढ़ावा, बन रहे जैविक कीटनाशक

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्राकृतिक खेती और गो-आधारित कृषि के विजन को धरातल पर उतारते हुए ये सखियां खुद जैविक खाद और कीटनाशक तैयार कर रही हैं। जिसके क्रम में इन महिलाओं के द्वारा बनाये गए घनजीवामृत और बीजामृत से खेतों को उपजाऊ बनाया जा रहा है वहीं नीमास्त्र और पंचगव्य जैसी स्वदेशी दवाओं से बिना किसी केमिकल के फसलों को कीटों से बचाया जा रहा है। इसके अलावा गांवों में चौपाल लगाकर किसानों को प्राकृतिक खेती के गुर भी इनके द्वारा सिखाए जा रहे हैं। जिससे खेती की लागत आधी और मुनाफा दोगुना हो रहा है। 


गोवंश संरक्षण और पशुपालन को नई दिशा

योगी सरकार की गोवंश संरक्षण नीति को आगे बढ़ाते हुए ये सखियां पशुपालन के क्षेत्र में भी सराहनीय काम कर रही हैं। गांवों में पशुओं की प्राथमिक साफ-सफाई, टीकाकरण और हर्बल उपचार के लिए ग्रामीणों को जागरूक किया जा रहा है। सरकारी पशु चिकित्सकों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर ये सखियां टीकाकरण अभियान को शत-प्रतिशत सफल बना रही हैं। जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में दुग्ध उत्पादन और पशुधन की सुरक्षा सुनिश्चित हो रही है।


सीधे खाते में आ रहा मानदेय, महिलाएं हुईं आर्थिक रूप से समृद्ध

विभागीय अधिकारियों के मुताबिक योगी सरकार इन सखियों के हुनर और मेहनत का पूरा सम्मान कर रही है। मिशन के तहत इन्हें हर काम के बदले सीधे बैंक खातों में भुगतान किया जा रहा है। एक किचन गार्डन तैयार करवाने पर ही सरकार द्वारा 500 का मानदेय दिया जा रहा है। अन्य कार्यों के लिए भी अलग से पारिश्रमिक तय है। इस पारदर्शी व्यवस्था से ग्रामीण महिलाओं की आय बढ़ी है और वे आर्थिक रूप से पूरी तरह आत्मनिर्भर हो चुकी हैं। बुंदेलखंड की बदलती यह तस्वीर गवाही दे रही है कि योगी सरकार में विकास की बयार अब अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंच रही है।




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