परिघासन से सुधरेगी रीढ़, फेफड़ों का होगा विस्तार - Amja Bharat

Amja Bharat

All Media and Journalist Association

Breaking

Sunday, July 26, 2026

परिघासन से सुधरेगी रीढ़, फेफड़ों का होगा विस्तार

योगाचार्य रमेश सिंह राजपूत ने कुबेरगंज में कराया अभ्यास

 चित्रकूट,  सुखेन्द्र अग्रहरि  - योग को दैनिक जीवन में अपनाकर रीढ़ की हड्डी को मजबूत और फेफड़ों को स्वस्थ रखा जा सकता है। यह बातें योगाचार्य रमेश सिंह राजपूत ने शनिवार को कुबेरगंज कर्वी में आयोजित योग सत्र में कहीं। उन्होंने श्रद्धालुओं और उपस्थित लोगों को "परिघासन" का अभ्यास कराया। उन्होंने बताया कि परिघासन को अंग्रेजी में "गेट पोज" या "द्वार मुद्रा" भी कहा जाता है। यह आसन तिरछी मांसपेशियों, कूल्हे, घुटने, जांघों के भीतरी भाग, छाती, हैमस्ट्रिंग, कमर और पसलियों के बीच की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है। योगाचार्य ने बताया कि नियमित अभ्यास से रीढ़ की हड्डी लचीली होती है, तिरछी मांसपेशियां सुडौल बनती हैं, घुटनों की परेशानी दूर होती है और पाचन क्रिया भी मजबूत होती है। साथ ही फेफड़ों का विस्तार होने से सांस संबंधी समस्याओं में भी लाभ मिलता है।



ऐसे करें परिघासन

योगाचार्य रमेश सिंह ने बताया कि पहले वज्रासन में घुटनों के बल बैठें। बाएं पैर को बगल में घुटने से सीधा फैलाएं और दाहिना पैर घुटने से 90 अंश पर रखें। अब सांस भरते हुए दाहिने हाथ को ऊपर उठाकर कमर से शरीर को बाईं ओर झुकाएं। इससे दाईं पसलियों में अच्छा खिंचाव महसूस होगा। सांस छोड़ते हुए वापस सीधे हो जाएं। इसे 3 से 5 बार दोहराएं। इसके बाद यही प्रक्रिया दूसरी तरफ से करें और अंत में विश्राम करें।


सावधानी

उन्होंने बताया कि हर्निया और पेट की सर्जरी से पीड़ित लोगों को यह आसन नहीं करना चाहिए। अभ्यास से पहले योग विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें। सत्र में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक, महिलाएं और युवा उपस्थित रहे।


No comments:

Post a Comment

Post Bottom Ad

Pages